छपरा सदर अस्पताल में दवाओं का टोटा ; सभी लाईफ सेविंग दवाएं भी नही है उपलब्ध ; मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती है आवश्यक दवाएं

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 Chhapra Desk – एक तरफ स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में लगा हुआ है तो दूसरी तरफ छपरा सदर अस्पताल में दवाओं का भी टोटा है और तो और जिला अस्पताल में अनेक लाईफ सेविंग दवाएं भी उपलब्ध नही है. जिसको लेकर आये दिन बाहर से दवा खरीदने को लेकर मरीज हो हल्ला करते रहते हैं. लेकिन यह दवाओं की उपलब्धता पर हमेशा ही प्रश्न चिन्ह खडे होते हैं. अनेक मरीजों एवं प्रसव पीड़िताओं के परिजनो को भी ग्लाव्स एवं अन्य दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ती है. ऐसे में चिकित्सक के द्वारा या तो बाहर की दवाएं पर्ची पर लिखी जाती हैं अथवा अस्पताल की दवा भी मरीजों को बाहर से ही खदीरनी पड़ती है. ऐसे में हंगामा भी लाजमी है. एक तरफ अस्पताल प्रशासन दवाओं की उपलब्धता का दावा करता है तो चिकित्सक के द्वारा लिखी गयी दवा भी मरीजों को काउंटर से उपलब्ध नही हो पाती है. ऐसे में अस्पताल की वह दवा भी मरीज को बाहर से खरीदकर लानी पड़ती है। जाे कि कहीं न कहीं अस्पताल प्रशासन के उपर सवाल खडे करता है. इस दौरान दवाओं की उपलब्धता पर आपातकालीन ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डा. हरेंद्र कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में अनेक लाइफ सेविंग दवाएं उपलब्ध नही है. अगर कोई सीरियस मरीज आता है तो उनको मजबूरी में बाहर की दवाएं लिखनी पड़ती है. उन्होंने बताया कि लाइफ सेविंग दवाओं में हार्ट अटैक आने वाले मरीजों के लिए डेक्सोसिन या कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। बीपी बढ़े हुए किसी मरीज के लिए भी यहां कोई इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. वहीं जहर खाकर आनेवाले मरीजों के लिए एंटीडोज की दवा हो या लाइफ सेविंग एड्रेनिलिन दवा या फिर शराब पीकर आनेवाले मरीजों के लिए बी-कम्पलेक्स की कोई दवा उपलब्ध नहीं है. वही बर्न केस के मरीजों को अधिकांश दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ती है. वैसे मरीजों को सिल्वर सल्फाडाईजिन का जेल भी बाहर से महंगे दामों मेें खरीदकर लाना पड़ता है. वहीं अस्पताल में उल्टी रोकने के लिए भी कोई इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. वहीं अगर किसी मरीज को ब्लड या आरएल चढ़ाया जाना है तो उसके लिए इंट्राकेथ, बीटी सेट भी बाहर से ही खदीरनी पड़ती है. इसके अलावे डेरिफाइलिंग दवा, 10 एमएल सिरिंज एवं कैनुला भी मरीजों को बाहर से ही खरीदनी पड़ती है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

इस मामले में सिविल सर्जन डा. माधवेश्वर झा ने बताया कि जो दवा और पैथोलाजिकल जांच सदर अस्पताल में उपलब्ध है वह दवाएं अस्पताल की ही लिखी जानी है और जो दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है वह बाहर की दवा लिखा जाना इसलिए आवश्यक है कि मरीज की जान बचायी जा सके. उनके द्वारा अस्पताल के सभी चिकित्सकों को यह निर्देश दिया गया है.

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