Chhapra Desk – छपरा शहर के एकलौते शिशु पाार्क, जिसके सौंदर्यीकरण के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है. पहले डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किये गये और फिर दो साल बाद ही 1.64 करोड़ रुपये खर्च किये गये है. फिर भी न तो वोटिंग की सुविधा दी गई और न ही कैंटिन खुला. ट्रैक है भी तो टूटी-फूटी हालत में है. हुआ यू कि डूडा ने 1.64 करेाड़ खर्च कर पब्लिक के हवाले कर दिया.

न तो सुरक्षा की किसी को जिम्मेदारी दी गई और न ही खुद ही देखरेख किया गया. लिहाजा एक साल भी नहीं बीता और एक-एक कर 145 खंभों में लगे लाइट को लोगों ने उखाड़ ले गये. यानी पार्क में एक भी सही स्थिति में लाइट नहीं है. सिस्टम भी इतना बेपरवाह की न तो रोकथाम लगाया न ही कोई कार्रवाई और सुरक्षा का इंतजाम.

प्राक्कलन में था वोटिंग,कैंटिन और कैफेटेरिया बनाना,बने भी नहीं राशि खर्च दिखा दी गई
शहर के एक मात्र चिल्ड्रेन पार्क में करोड़ो रुपये खर्च कर सौंदर्यीकरण का कार्य हुआ था. इसके बावजूद भी बदहाल स्थिति में है. देख रेख के अभाव में असामाजिक तत्वों ने पार्क में लगे लाइट व सोलर प्लेट को तोड़ दिया है और चोरी कर लिया. चिल्ड्रेन पार्क को सुव्यवस्थित बनाने के लिए नगर विकास योजना के अंतर्गत इसका रिमॉडलिंग किया गया. जो शहर के मध्य भाग में स्थित बच्चों का एक मात्र मनोरंजक स्थल है. एक करोड़ 64 लाख 9 हजार रुपए की लागत से पूरे परिसर में लैम्प पोस्ट, कैफेटेरिया, ग्रास कारपेट, तालाब का घाट, सीढ़ियों पर स्टोन फिटिंग, बोरिंग, बच्चों के लिए झूले आदि लगाये गए थे.

पार्क में लगे स्ट्रीट बल्ब
पार्क परिसर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नही है. ऐसे में इस पार्क में रिमॉडलिंग के बाद लगे लैंप पोस्ट, लोहे का ग्रिल तथा पार्क परिसर में स्थित तालाब के सीढ़ियों पर लगा स्टोन तक चोर उखाड़ कर ले गए हैं. अब हालात ऐसे हैं कि शाम को जैसे ही अंधेरा होता है. वैसे ही यहां लोगों का आना जाना बंद हो जाता है.

जर्जर हो चुके हैं बच्चों के झूले
पार्क का जीर्णोद्धार तो हुआ और तालाब के घाट, लैम्प पोस्ट, बोरिंग आदि का कार्य भी हुआ है. पर ग्रास कारपेट व बच्चों का झूला कहीं दिखाई नहीं देता है. कुछ पुराने झूले हैं जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. उन्हें आज तक हटाया नहीं जा सका. मुरचाये झूले बच्चों के लिये खतरनाक साबित हो रहे हैं. झूले के अभाव में अब यहां आने वाले कुछ बच्चों ने पेड़ की डाल को ही झूला बना लिया है.

एक साल बाद भी नहीं शुरू हुई बोटिंग
पार्क के तालाब को भी लाखों रुपये खर्च कर रिमॉडलिंग किया गया था। सीढ़ियों पर स्टोन फिटिंग आदि का कार्य हुआ था. पार्क के तालाब में बोटिंग की शुरुआत करने की योजना थी, लेकिन यह आज तक नहीं हो सका. मेंटेनेंस के अभाव में तालाब पूरी तरह सूख चुका है. सूखे हुए तालाब में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं.

क्या कहते है अधिकारी
इस मामले में नगर आयुक्त अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि
शिशु पार्क की देखरेख के लिए डूडा को जिम्मेदारी दी गई है. डूडा के अफिसर से सामंजस्यता स्थापित कर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करायी जायेगी. बात तो सही है कि देखरेख नहीं होने की वजह से लगे लाइट नुकसान कर दिया गया है.

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