Chhapra Desk – यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विभिन्न स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. यक्ष्मा उन्मूलन के लिए विभाग प्रतिबद्ध है. इसको लेकर नये-नये तकनीक का इजाद किया जा रहा है. इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने नयी पहल की शुरुआत की है. टीबी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट की शुरुआत बुधवार को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया. मंत्री ने कहा कि हमे प्रसन्नता है कि टीबी उन्मूलन के दिशा में आज यह कार्यक्रम की शुरूआत कर रहें है. टीबी समाज में एक गंभीर बिमारी है, इसको प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट से रोक सकते है. 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य है. राज्य में टीबी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के कई कार्यक्रम चल रहे हैं. टीबी जैसी बीमारी की शीघ्र पहचान एवं उपचार जरूरी है. इसको ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा टीबी प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट का आरंभ राज्य के 11 जिलों में किया गया. आने वाले दिनों में अन्य जिलों इसकी शुरूआत होगी। बिमारी आने से पहले हीं सुरक्षा चक्र देना आवश्क है ताकि सभी लोग सुरक्षित हो जाये। पूरी दुनिया और देश में यह ऐसी बिमारी जिसमें भारत में हीं 26 प्रतिशत लोग टीबी से ग्रसित है. इसके उन्मूलन के कई स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। सभी जगहों पर जांच की व्यवस्था है। इसके साथ हीं उपचार सुविधा उपलब्ध है। टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वालों के लिए बचाव जरूरी. राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत समय-समय से जांच, नियमित उपचार के साथ-साथ टीबी से बचाव के लिए कई कार्यक्रम हो रहे हैं. उसी के तहत संक्रामक फेफड़े के टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले छह वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा एचआईवी संक्रमित बच्चों व वयस्कों को आइसोनिआजिड प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट दी जा रही है. टीबी चैंपियन के माध्यम से टीबी के प्रति समाज में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है.

एनटीइपी के तहत टीबी रोगियों के निःशुल्क जांच एवं उपचार
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य के छह जिलों नालंदा, भागलपुर, समस्तीपुर, सिवान, वैशाली एवं गोपालगंज में सरकारी तंत्र के माध्यम से क्रियान्वयन किया जाना है. वहीं पांच जिलों में ज्वाइंट एफर्ट फॉर एलिमेशन ऑफ टीबी (जीत) के तहत दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सारण, पूर्वी चंपारण एवं पूर्णिया में इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जाएगा। एनटीईपी के तहत टीबी रोगियों की निशुल्क जांच एवं उपचार, पंजीकृत रोगियों को निक्षय पोषण योजना का लाभ मिल सके. इसके लिए सभी जिलों में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. पेशेंट लगातार नोटिफाइड हो रहे है। उनके उपचार के साथ राशि भी दी जा रही है. इस कार्यक्रम में सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, सीडीओ, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे.

पल्मोनरी टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले बच्चों व वयस्कों का होगा इलाज
सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत समय से जांच, नियमित व पूरे उपचार के साथ-साथ टीबी से बचाव के लिए संक्रामक पल्मोनरी टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले छह वर्ष से कम आयु के बच्चों व एचआईवी संक्रमित बच्चों व वयस्कों को आइसोनिआजाइड प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट दी जायेगी. केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रोग्रामेटिक मैनेजमेंट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट के अनुसार अब टीबी प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट “माइक्रोबायोलाजिकली कन्फम्ड पल्मोनरी टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले बच्चों व वयस्कों को भी टीबी प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट प्रदान की जानी है. टीबी रोगियों के परिवारों की पहचान कर जांच की प्रक्रिया की जायेगी.

टीबी रोगियों के परिवारों की भी पहचान कर जांच की प्रक्रिया तेज
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रत्नेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि टीबी रोगियों के परिवारों की भी पहचान कर जांच की प्रक्रिया तेज की जायेगी. ताकि टीबी की पूर्ण समाप्ति के लिए लड़ाई लड़ी जा सके. इसके तहत टीबी पीड़ित रोगियों के संपर्क में रहने वाले परिवार के सभी सदस्यों को टीबी रोग से मुक्त रखने के लिए टीवी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट प्रारंभ किया गया है. इस योजना के तहत 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है.

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