रमजान के तीसरे जुमा पर मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़

रमजान के तीसरे जुमा पर मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़

CHHAPRA DESK – रमजान के तीसरे जुमे पर शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए रोजेदार की भारी भीड़ उमड़ी. शहर के करीमचक, खनूआ चौक, साहेबगंज, छोटा तेलपा, बड़ा तेलपा, रौजा, दहियावां, नई बाजार, भगवान बाजार, कटरा, गुदरी, नबी गंज, जालालपुर, ब्रह्मपुर सहित कई मुहल्लों समेत जामा मसजिदों में नमाज अदा करने के लिए काफी लोग पहुंचे. तीसरे जुमे पर बुजुर्ग व कमजोर लोगों ने भी मसजिद में आकर नमाज पढ़ना जरूरी समझा.

रोजेदारों की भीड़ को देखते हुए मस्जिदों में विशेष इंतजाम किया गया था. नमाज के बाद मस्जिदों में मौलाना और इमामों ने रोजेदारों को पाक महीने रमजान के जुमे की विशेषता बतायी. साथ ही उन्होंने राजेदारों से इस माह की पवित्रता बनाए रखने की अपील की. जामा मस्जिद में मौलाना नेसार अहमद मिस्बाही, खनूआ मस्जिद में मौलाना अब्दुल कादिर, मौला मस्जिद में मौलाना जाकिर, शिआ मस्जिद में मौलाना सैयद मासूम रजा, बड़ा तेलपा में मौलाना रज्जबुल कादरी आदि ने तकरीरें कीं.

उन्होंने रमजान को रहमतों व बरकतों वाला महीना बताया जिसमें अल्लाह शैतान को कैद कर देता है. जिससे वह लोगों की इबादत में खलल न डाले. माैलाना कादिर कहते हैं कि रमजान-उल-मुबारक में हर नेकी का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है. हर नवाफिल का सवाब सुन्नतों के बराबर व हर सुन्नत का सवाब फर्ज के बराबर कर दिया जाता है. इस तरह सभी फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है. मतलब यह कि इस माहे-मुबारक में अल्लाह की रहमत खुलकर अपने बन्दों पर बरसती है.

रमजान में ही पाक कुरआन शरीफ उतारा गया. हजरत मुहम्मद पैगंबर रमजान में अपनी इबादत बढ़ा दिया करते थे. वे दिन भर रोजा रखते व रात भर इबादत में गुजारते थे. उन्होंने कहा कि रमजान के पहले अशरे में अल्लाह की रहमत के लिए ज्यादा से ज्यादा इबादत की जानी चाहिए. इसी तरह रमजान के दूसरे अशरे में अल्लाह से अपने गुनाहों की रो-‍रोकर माफी मांगनी चाहिए. रमजान के तीसरे अशरे में जहन्नम की आग से अल्लाह की पनाह मांगने का है.

रोजा खुलवाने के लिए सभी मसजिदों में इफ्तार का एहतमाम किया जा रहा है. वहीं लोगों के द्वारा भी इफ्तार पार्टी देने का दौर शुरू हो गया है. मौके पर राहतुन नईम ने कहा कि रमजान के महीने में जहां तक संभव हो, गरीब-दुखियों की सेवा करनी चाहिए. अनेकता में एकता बनाए रखने का संकल्प लेनी चाहिए और मुल्क के सलामती और अमन की दुआ करनी चाहिए.

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