CHHAPRA DESK – लोक आस्था का महापर्व चैती छठ शनिवार से नहाय खाय के साथ शुरू हुआ. छठ व्रत के दूसरे दिन व्रती महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ चावल की खीर और रोटी बनाकर फलमूल के साथ खरना किया और उसके बाद प्रसाद को परिजनों में बांटा. खरना के प्रसाद को लेकर कई नियमों का पालन किया जाता है. खरना की खीर ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का व्रत शुरू हो जाता है.

27 मार्च को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को देंगी अर्घ्य
चार दिवसीय इस पर्व में महिलाएं परिवार में सुख समृद्धि और दीर्घायु के लिए कठिन व्रत रखती हैं. खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास भी शुरू हो जाता है. अब कल सोमवार को यानि 27 मार्च को छठी व्रती महगलाएं अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगी. फिर 28 मार्च को उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय छठ पर्व समापन हो जाएगा. बता दें कि छठ महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है. एक कार्तिक के शुक्ल पक्ष में और दूसरा चैत माह के शुक्ल पक्ष में.

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