सृजन सारथी-अमियनाथ चटर्जी” पुस्तक सहित अन्य दो पुस्तकों का किया गया विमोचन

Chhapra Desk – छपरा शहर के राजेन्द्र सरोवर स्थित एक विवाह भवन के सभागार में कश्मीरा सिंह द्वारा सम्पादित पुस्तक “सृजन सारथी-अमियनाथ चटर्जी” का लोकार्पण प्रो कृष्ण कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ. इस कार्यक्रम में शहर के बुद्धिजीवी, शिक्षक, समाजसेवी शामिल हुए और अमियनाथ चटर्जी के साहित्यिक सांस्कृतिक अवदानों पर चर्चा की. सृजन सारथी की सम्पादिका कश्मीरा सिंह ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अमियनाथ चटर्जी शहर के सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियों की धुरी के समान थे. वे एक सरल स्वभाव के इंसान एवं परम मातृभक्त भी थे. पैंतालीस वर्षों तक उन्होंने प्रतिवर्ष अपनी माता स्वर्ण लता देवी की जयंती का नियमित रूप से आयोजन किया और अब यह कार्य मैंने उनकी बहन के रूप में संभाल लिया.

मेरी चिंता थी कि अमिय दा के जीवन रहते यह अभिनंदन ग्रंथ उनके हाथों में सौंप सकू तो मुझे खुशी होगी. मैं सारव प्रकाशन के प्रो पृथ्वीराज सिंह का धन्यवाद ज्ञापन करती हूं, जिनके सक्रिय सहयोग के कारण अत्यंत अल्प समय में यह पुस्तक प्रकाश में आ सका. वहीं प्रसिद्ध रंगकर्मी और अधिवक्ता पशुपतिनाथ अरुण ने भी अपने रंगकर्म की गतिविधियों, प्रशिक्षण आदि के अनुभव को अमिय दा को संदर्भित करते हुए साझा किया. वहीं प्रो पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि अमियनाथ चटर्जी के रक्त में एक स्वतंत्रता सेनानी की धारा प्रवाहित होती थी. उनका जीवन और कर्म बंगाल के नवजागरण और समृद्ध नाट्य कर्म का अनुपम उदाहरण है. वहीं शंभू कमलाकर मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि अमिय दा बहुत ही मिलनसार और प्रेमी व्यक्ति थे. उन्होंने हिंदी, बांग्ला और भोजपुरी में रंगकर्म और साहित्य रचना की है.

कार्यक्रम के अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो केके द्विवेदी ने कहा कि हमलोगों की पुस्तक प्रकाशन की योजना पिछले कई वर्षों से लंबित थी पर कश्मीरा सिंह और सारव प्रकाशन के सहयोग से ही संभव हो सका. यह एक बहुप्रतीक्षित एवं आवश्यक कार्य संपन्न हुआ है. अमियनाथ चटर्जी मेरे मित्र हैं और उनके कार्यक्रम में समय की पाबंदी का बहुत बड़ा महत्व होता था. सभी कार्यक्रम उचित समय पर प्रारंभ होते थे और खासकर स्वर्णलता जयंती पर तो जिले के बड़े बड़े पदाधिकारी भी शामिल होते थे.
उन्होंने अमियनाथ चटर्जी को दीर्घायु होने की कामना की.

इस अवसर पर डॉ. राजू प्रसाद द्वारा लिखित दो अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ. मंच संचालन का कार्य भार भंवर किशोर निगम ने किया. इस कार्यक्रम को संबोधित करने वाले उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में ब्रजेंद्र नाथ सिन्हा, आशा शरण श्रीवास्तव, जौहर शफियाबादी, डॉ अरूण कुमार और प्रो चिरंजीव लोचन शामिल थे.

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