CHHAPRA DESK – सारण जिले में पुल के गिरने का बुखार-सा चल निकला है. आजकल बारिश के दरम्यान कौन पुल गिर जाएगा यह कहना बहुत ही मुश्किल हो रहा है. आलम यह है कि पुल के ऊपर से गुजरने पर धड़कनें तेज हो जा रही हैं, क्योंकि सारण जिले में अब तक जहां तीन पुल बारिश के कारण नदी में बह चुके हैं वहीं चौथे पुल को बैरिकेडिंग कर वहां आवागमन को बाधित कर दिया गया है. ताजा मामला जिले के बनियापुर थाना क्षेत्र से सामने आया है.

जहां 5 वर्ष पूर्व बनाया गया पुल भी हल्की बारिश में नदी के पानी में बह गया है. जिसके बाद यह जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है कि महज 5 वर्ष में पुल कैसे गिर गया. वास्तव में पुल का गिरना कमीशन खोरी का खेल है. जो कि ठेकेदार से लेकर अभियंता और विभाग तक इसमें संलिप्त होते हैं, जो की जग विदित है. बनियापुर का यह पुल स्थानीय मुखिया श्रवण महतो के द्वारा बनवाया गया था.

जबकि इससे पहले सारण जिले में बीते दिन एक साथ गंडकी नदी पर बने दो पुल ध्वस्त हो चुके हुए हैं, वहीं तीसरे पुल को बैरिकेडिंग किया गया है ताकि उसके ढहने से कोई हादसा नहीं हो. गंडकी नदी में पानी बढ़ने के कारण दबाव बढ़ा और जहां ढोढनाथ मंदिर के समीप का पुल देखते ही देखते भर-भराकर नदी में गिर पड़ा, वहीं दंदासपुर गांव के समीप भी गंडकी नदी पर बना पुल का एक पिलर धसने के कारण पुल नदी में गिर पड़ा.

पहला श्रीढोंढ़नाथ मंदिर के निकट गंडकी नदी पर बने पुल का निर्माण 2004 में लगभग बाइस लाख रुपए के लागत से हुआ था. जबकि इसी नदी पर दंदासपुर जंगलविलास टोला स्थित ब्रिटिश जमाने का बना पुल भी ध्वस्त हो गया है. इन पुलों के टूटने से फिलहाल किसुनपुर, लौआर तथा दंदासपुर पंचायत का संबंध टूट गया है. कई गांव के लोगों को एक दूसरे पंचायत में आने-जाने में परेशानी बढ़ गयी है.

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