SARAN DESK – बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मनरेगा में किए गए बदलावों और ‘बीबी रामजी योजना’ (विकसित भारत आजीविका मिशन 2025) को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए गेम-चेंजर बताया. सर्किट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मंत्री ने कहा कि जब तक समाज के निचले तबके के लोगों का आर्थिक उत्थान नहीं होगा, तब तक ‘विकसित भारत और विकसित बिहार’ की कल्पना अधूरी है.

यह योजना रोजगार की नई गारंटी : 100 की जगह 125 दिन काम
मंत्री लखेंद्र कुमार ने योजना की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्व की मनरेगा योजना की तुलना में यह एक बेहतर विकल्प है. अब गरीबों को साल में 100 दिन के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है. केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 85,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.

विपक्ष पर प्रहार और प्रशासनिक सक्रियता
योजना में बदलाव को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध पर तंज कसते हुए मंत्री ने कहा कि विपक्ष को विकास रास नहीं आ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत ग्राम सभा और वार्ड सभा के माध्यम से योजनाओं का चयन होगा. जिससे सीधे तौर पर गांव का विकास सुनिश्चित होगा. इस संबंध में उन्होंने सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से भी मुलाकात की और योजना को धरातल पर कड़ाई और पारदर्शिता के साथ लागू किया जा सके.

एनडीए कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत
इससे पहले सर्किट हाउस पहुंचने पर एनडीए कार्यकर्ताओं ने मंत्री का बुके देकर गर्मजोशी से स्वागत किया. प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह, लोजपा (रा) जिलाध्यक्ष राजीव प्रताप राठौड़, रालोसपा जिलाध्यक्ष डॉ अशोक कुशवाहा, हम जिलाध्यक्ष उज्जवल श्रीवास्तव, छपरा विधायक छोटी कुमारी, धर्मेंद्र साह, सहित एनडीए के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार सिंह, अर्द्धेन्दु शेखर, शंभू मांझी और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे. मंत्री ने अंत में दोहराया कि एनडीए सरकार का दृढ़ संकल्प है कि ग्रामीणों को उनके अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार मिले और ‘बीबी रामजी योजना’ इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है.

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