केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सवर्ण समाज का उग्र लोकतांत्रिक विरोध

केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सवर्ण समाज का उग्र लोकतांत्रिक विरोध

PATNA DESK – परशुराम सेवा संघ राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं युवा ब्राह्मण चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में आज गर्दनीबाग धरना स्थल, पटना में एकदिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया. यह धरना केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 जैसे जनविरोधी व सवर्ण-विरोधी कानून के खिलाफ तथा प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य एवं ब्राह्मण बटुकों के साथ हुए अमानवीय दुर्व्यवहार के विरोध में आयोजित किया गया. धरना को संबोधित करते हुए परशुराम सेवा संघ राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय संयोजक सह प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार ऐसे कानून ला रही है जो सवर्ण समाज को शिक्षा, रोजगार और सम्मान से वंचित करने की साजिश का हिस्सा हैं.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 को पूर्ण रूप से वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण किंतु निर्णायक रूप से जारी रहेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट को समीक्षा के लिए भेजा गया था, तब सरकार ने अध्यादेश लाकर उसे पारित कर दिया. अब यह मामला सीधे-सीधे हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा है. सवर्ण समाज अब चुप नहीं बैठेगा और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर संघर्ष करेगा. युवा ब्राह्मण चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुभाष पांडे ने कहा कि सवर्ण समाज को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है.

सत्ता में बैठे तथाकथित सवर्ण प्रतिनिधि सदन में मौन धारण कर समाज के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समाज को संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिकार करना होगा. धरना को संबोधित करते हुए संतोष चौधरी प्रदेश अध्यक्ष युवा ब्राह्मण चेतना मंच ने कहा कि प्रयागराज माघ मेला में जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनंद जी एवं ब्राह्मण बटुकों के साथ प्रशासनिक दुर्व्यवहार सनातन संस्कृति के लिए कला अध्याय है शासन प्रशासन को अभिलंब माफी मांगकर करोड़ों सनातनियों की आस्था का सम्मान करना चाहिए।चंदन मिश्रा प्रदेश महासचिव परशुराम सेवा संघ ने कहा सवर्ण समाज को अब जागना होगा और अपने अधिकारों, सम्मान एवं भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष करना होगा. यह आंदोलन किसी व्यक्ति या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्यायपूर्ण सरकारी नीतियों के खिलाफ है.


इस धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने में प्रदेश के कोने-कोने से आए सवर्ण समाज के प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. आयोजकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जनविरोधी नीतियाँ वापस नहीं ली गईं तो आंदोलन को और व्यापक व तीव्र किया जाएगा. मुख्यरूप चन्दन मिश्रा,संपूर्णानंद पाठक, विवेकानंद ठाकुर,अमरेंद्र त्रिपाठी,अनिल झा दिलीप ठाकुर अधिवक्ता संजीव आनंद, संजीव मिश्रा,सतीश झा, ब्रजेश मिश्रा, मनोज सिंह, राजीव नयन, नारायण झा, राघव झा, पंडित त्रिपुरी झा, गौ सांसद राहुल भारद्वाज, घनश्याम मिश्र, रंजीत मिश्रा समेत समाज के अनेक लोग शामिल हुए.

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