
DARBHANGA DESK – दरभंगा से पुणे जा रही ट्रेन संख्या 11033 दरभंगा–पुणे एक्सप्रेस उस समय दहशत का केंद्र बन गई, जब असामाजिक तत्वों ने पथराव कर जनरल कोच का शीशा तोड़ दिया. यह महज़ उपद्रव नहीं, बल्कि अलार्म चेन पुलिंग की आड़ में की जा रही शराब तस्करी की सुनियोजित साजिश का हिस्सा था. आरपीएफ की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से न सिर्फ तस्करी नाकाम हुई, बल्कि एक संभावित बड़ी रेल वारदात भी टल गई. घटना सोनपुर रेल मंडल के सोनपुर परमानंदपुर स्टेशन के बीच बीती रात करीब 2:10 बजे की है. मंडल सुरक्षा आयुक्त, सोनपुर के निर्देश पर चल रहे ड्यूटी एस्कॉर्ट कार्यक्रम के तहत उपनिरीक्षक दिनेश कुमार सिंह और प्रधान आरक्षी रंजीत कुमार राय ट्रेन संख्या 11124 को सोनपुर से छपरा तक एस्कॉर्ट करने के बाद 11033 दरभंगा–पुणे एक्सप्रेस से सोनपुर लौट रहे थे.

उसी दौरान ट्रेन को अचानक ACP कर रोक दिया गया. जैसे ही ट्रेन रुकी, आरपीएफ जवानों ने इंजन से सटे जनरल कोच के पास संदिग्ध गतिविधि देखी. टॉर्च की रोशनी में 4–5 युवक एक बड़े काले बैग के साथ उतरते नजर आए. हालात को भांपते हुए जवानों ने तुरंत चेन पुलिंग दुरुस्त की. खुद को घिरता देख तस्कर बैग छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए. ट्रेन के खुलते ही असामाजिक तत्वों ने यात्रियों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से पथराव कर दिया, जिससे जनरल कोच के एक-दो शीशे टूट गए. हालांकि आरपीएफ की मुस्तैदी के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और ट्रेन को सुरक्षित सोनपुर स्टेशन के लिए रवाना कर दिया गया.

बरामद काले बैग को सोनपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 3 के पूर्वी छोर पर उतारा गया. तलाशी के दौरान बैग से “माको प्रीमियम रजनीगंधा” अंकित 26 बोतल रॉयल स्टैग सुपीरियर व्हिस्की (750 एमएल) और 14 कैन किंगफिशर एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग बीयर (500 एमएल) बरामद की गईं। सभी बोतलों व कैनों पर “For Sale in UP Only” अंकित था.
बरामद शराब की कुल मात्रा 26.5 लीटर आंकी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 19,640 रुपये बताई जा रही है.

मामले में रेल थाना सोनपुर में प्राथमिकी दर्ज कर बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम तथा रेलवे अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी गई है. आरपीएफ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फरार तस्करों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. यह घटना साफ दर्शाती है कि शराब तस्कर अपने मुनाफे के लिए रेल यात्रियों की जान जोखिम में डालने से भी नहीं चूकते. लेकिन आरपीएफ की सतर्क निगरानी और त्वरित कार्रवाई उनके मंसूबों पर भारी पड़ रही है.

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