साइबर अपराधी ने ठेकेदार बन ईंट खरीदने के नाम पर व्यवसायी के खाते से ₹20 हजार कर दिए गायब

साइबर अपराधी ने ठेकेदार बन ईंट खरीदने के नाम पर व्यवसायी के खाते से ₹20 हजार कर दिए गायब

CHHAPRA DESK – साइबर अपराधी लगातार किसी न किसी रूप में अपनी धमक दिखला रहे हैं और लोगों के खाते पर हाथ साफ कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला शहर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के विष्णुपुरा गांव से सामने आया है, जहां गोल्डिनगंज रेलवे स्टेशन का ठेकेदार बताकर एक साइबर अपराधी ने ईंट व्यवसायी के खाते से 19,999 रुपये उड़ा लिए. इस संबंध विष्णुपुरा गांव निवासी चंदन कुमार सिंह ने मुफ्फसिल मे घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई है. जिसमें पीड़ित चंदन कुमार सिंह ने बताया है कि 11 फरवरी की सुबह उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को गोल्डिनगंज रेलवे स्टेशन का ठेकेदार बताया.

उसने कहा कि स्टेशन परिसर में कुछ निर्माण कार्य चल रहा है जिसके लिए तत्काल चार ट्रेलर ईंट गोल्डिनगंज रेलवे स्टेशन पर जरूरत है. आरोपी ने भरोसा दिलाया कि ईंट की आपूर्ति होते ही पूरा भुगतान कर दिया जाएगा और आगे भी नियमित काम दिया जाएगा. काम का लालच और भरोसेमंद बातचीत के कारण पीड़ित उसके झांसे में आ गए. भुगतान प्रक्रिया के नाम पर ठगी कॉल के दौरान तथाकथित ठेकेदार ने कहा कि भुगतान प्रक्रिया और रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. इसके लिए आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी मांगी गई.

उसने यह भी कहा कि पहले एक रुपये का ट्रांजैक्शन कर पुष्टि कर लें, ताकि भुगतान प्रक्रिया सक्रिय हो सके.  आरोपी ने मोबाइल पर एक क्यूआर कोड भेजा. पीड़ित ने निर्देशानुसार एक रुपये का ट्रांजैक्शन किया. कुछ देर बाद दो रुपये वापस खाते में आ गए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि प्रक्रिया सही है. इसके बाद आरोपी ने आगे की प्रक्रिया बताते हुए दोबारा क्यूआर कोड स्कैन करने और निर्देशों का पालन करने को कहा. जैसे ही पीड़ित ने बताए गए स्टेप पूरे किए, अचानक उनके मोबाइल पर 19,999 रुपये खाते से कटने का संदेश  आ गया.

जिसके बाद पीड़ित के होश उड़ गए. उन्होंने तुरंत मुफ्फसिल थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई. जिस मामले में पुलिस ने आईटी एक्ट फ्रॉड के तहत कांड संख्या 105/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस संबंध में मुफस्सिल थानाध्यक्ष ने बताया कि  संबंधित मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल ट्रांजैक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है. साइबर सेल की मदद से आरोपी की पहचान और लोकेशन ट्रेस का प्रयास किया जा रहा है.

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