एसडीएम कार्यालय में रिश्वत लेते स्टेनो गिरफ्तार, सृजन घोटाले से भी जुड़ा नाम

एसडीएम कार्यालय में रिश्वत लेते स्टेनो गिरफ्तार, सृजन घोटाले से भी जुड़ा नाम

PATNA DESK – निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भागलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सटीक कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय में तैनात स्टेनो प्रेम कुमार को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया. यह छापेमारी गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें पता चला कि सरकारी काम के एवज में भारी राशि की मांग की जा रही थी. सूचना का सत्यापन करने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाकर आरोपित को पकड़ लिया. डीएसपी विंध्याचल प्रसाद के नेतृत्व में निगरानी टीम ने दबोचा. इस भ्रष्टाचार के खेल में प्रेम कुमार अकेला नहीं था. निगरानी टीम ने मौके पर उसके सहयोगी मयंक कुमार को भी दबोच लिया. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मयंक रिश्वत लेने की प्रक्रिया में बिचौलिए या सहायक की भूमिका निभा रहा था. दोनों के कब्जे से रिश्वत की पूरी रकम बरामद की गई और आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया.

 

सृजन घोटाले’ से जुड़ा पुराना नाता

गिरफ्तार स्टेनो प्रेम कुमार का इतिहास विवादास्पद रहा है. वह पहले जिला अधिकारी (DM) का पीए रह चुका है और बिहार के चर्चित ‘सृजन घोटाले’ में भी उसका नाम प्रमुखता से सामने आया था. उस मामले में उसे जेल भी हुई. जेल से रिहा होने के बाद वर्तमान में वह एसडीएम कार्यालय में स्टेनो के पद पर तैनात था. हालांकि, कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं दिखा और पुराने आचरण की पुनरावृत्ति सामने आई है. इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद भागलपुर कलेक्ट्रेट और संबंधित सरकारी कार्यालयों में हड़कंप का माहौल है. अधिकारियों और कर्मचारियों में चर्चा है कि यह मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. निगरानी विभाग अब यह जांच कर रहा है कि क्या घूसकांड के तार विभाग के अन्य उच्च अधिकारियों से जुड़े हैं.

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि किसी भी लापरवाही या संलिप्तता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रेम कुमार और मयंक कुमार के खिलाफ जल्द ही कोर्ट में पेशी हो सकती है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि ऐसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा. अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की रिश्वत देने या लेने की कोशिश में शामिल न हों. विभाग का कहना है कि कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर घूसखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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