हास्य व्यंग के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि दूरदर्शी’ पुलिस विभाग में 34 वर्षों की शानदार सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त

हास्य व्यंग के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि दूरदर्शी’ पुलिस विभाग में 34 वर्षों की शानदार सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त

CHHAPRA DESK –  अपनी चुटीली कविताओं और हास्य व्यंग्य से लोगों को लोटपोट कर देने वाले भोजपुरी के राष्ट्रीय स्तर के चर्चित चेहरे और पुलिस सब-इंस्पेक्टर
सत्येंद्र नाथ सिंह ‘दूरदर्शी’ लगभग 34 वर्षों की अपनी अनवरत पुलिस सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं. उनके अवकाश प्राप्त करने पर छपरा पुलिस लाइन में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जहां सारण के एसएसपी विनीत कुमार ने उन्हें अंगवस्त्र और ‘रामचरितमानस’ भेंट कर पूरे सम्मान के साथ विदाई दी. इस भावुक पल में भी ‘दूरदर्शी’ ने अपनी चिर-परिचित शैली
में कविता पाठ और हास्य व्यंग्य प्रस्तुत किया, जिससे विदाई समारोह में मौजूद सभी पुलिस पदाधिकारी और जवान ठहाके लगाने को मजबूर हो गए.

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मूल रूप से सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत धवरी मदारपुर निवासी सत्येंद्र नाथ सिंह ‘दूरदर्शी’ के पुलिस विभाग में आने की कहानी भी उनकी कविताओं की तरह ही बेहद दिलचस्प है. दूरदर्शी शुरू से ही मंच के चर्चित कलाकार और कवि रहे हैं. वर्षों पूर्व पटना पुलिस लाइन में आयोजित ‘श्रीकृष्ण छठियार’ समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम में वे बतौर श्रोता शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम में मशहूर भोजपुरी गायक भरत शर्मा भी मौजूद थे. संयोग से उस समय के तत्कालीन मंत्री विजय कृष्ण ने सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दूरदर्शी की प्रतिभा से अवगत कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्हें मंच पर बुलाया गया। मंच पर जाते ही अपनी हास्य व्यंग्य की कविताओं से उन्होंने ऐसा समां बांधा कि लालू यादव बेहद प्रभावित हुए.

उनकी प्रतिभा से खुश होकर मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर तत्कालीन डीजीपी अरुण कुमार चौधरी ने उन्हें सीधे पुलिस सेवा में नौकरी दे दी थी. कई प्रधानमंत्रियों और डीजीपी से हो चुके हैं सम्मानित स्वर्गीय रामहृदय सिंह और माता सफेदी देवी के अनुज पुत्र सत्येंद्र नाथ सिंह ने अपने 34 साल के पुलिस करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) में 10 वर्षों तक बतौर अफसर अपनी सेवाएं दीं. इसके अलावा वे पटना, कैमूर, जमुई, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, छपरा शहर और मढ़ौरा सहित कई जिलों में पदस्थापित रहे. खाकी वर्दी पहनने के बाद भी उनके अंदर का कवि कभी खामोश नहीं हुआ.

पुलिस सेवा के दौरान उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें तत्कालीन डीजीपी पीके ठाकुर, आरआर प्रसाद और गुप्तेश्वर पांडेय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. वहीं, एक हास्य कवि के रूप में देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, वीपी सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव सहित कई दिग्गज राजनेताओं ने भी उन्हें सम्मानित किया है. पुलिस महकमे में उनकी छवि एक कड़क लेकिन संवेदनशील इंसान की रही है. उनकी सेवानिवृत्ति पर अधिकारियों ने कहा कि ‘दूरदर्शी’ जी भले ही पुलिस महकमे से रिटायर हो रहे हैं, लेकिन कला और साहित्य के मंच पर उनकी शानदार पारी हमेशा अनवरत जारी रहेगी.

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