
CHHAPRA DESK – छात्र संगठन आर एस ए के द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित कर जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में कार्यरत एवं वर्तमान में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो विश्वामित्र पाण्डेय के प्रोन्नति से जुड़े गंभीर तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया. प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संगठन के संरक्षक उज्ज्वल कुमार सिंह एवं छात्र नेता गुलशन यादव ने कहा कि जय प्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार ऐसे व्यक्तियों को संरक्षण दे रहा है जिनके विरुद्ध पूर्व में गंभीर आरोप प्रमाणित हो चुके हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण वर्तमान प्रॉक्टर प्रो विश्वामित्र पाण्डेय हैं, जिन्हें कथित रूप से गलत तरीके से एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत किया गया. संगठन के नेताओं ने प्रेस को दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि जब प्रो विश्वामित्र पाण्डेय जगदम कॉलेज, छपरा में कार्यरत थे, उस समय कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य प्रो केके बैठा द्वारा 06 जून 2023 को जारी CCR (Consistently Appraisal Report) में उनके संबंध में अत्यंत गंभीर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं.

CCR में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि उनकी ईमानदारी एवं विश्वसनीयता (Integrity and Reliability) “Doubtful” है तथा उसमें यह भी दर्ज है कि “Forgery Detected & Proved” अर्थात जालसाजी पकड़ी गई और प्रमाणित हुई। इतना ही नहीं, उनके नैतिक चरित्र (Moral Character) के संबंध में भी प्राचार्य ने लिखा कि यह “Not Satisfactory” है. सबसे गंभीर बात यह है कि उसी रिपोर्ट के अंतिम भाग में तत्कालीन प्राचार्य द्वारा स्पष्ट शब्दों में लिखा गया – “Not Recommended for Promotion” अर्थात उन्हें प्रोन्नति के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता. आर एस ए नेताओं ने आरोप लगाया कि जब प्रो. विश्वामित्र पाण्डेय Associate NCC Officer के रूप में जगदम कॉलेज में कार्यरत थे, उस दौरान उन्होंने कथित रूप से प्राचार्य के हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर आर्थिक राशि का उठाव (financial withdrawal) किया था. इसी मामले में उनके विरुद्ध आपत्ति दर्ज हुई थी और उक्त CCR रिपोर्ट तैयार की गई थी.

इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें न केवल प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत किया, बल्कि वर्तमान में विश्वविद्यालय जैसे संवेदनशील संस्थान में प्रॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर बनाए रखा है. आर एस ए के नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रो. विश्वामित्र पाण्डेय जब इग्नू (IGNOU) अध्ययन केंद्र के निदेशक हैं. उस दौरान विद्यार्थियों से असाइनमेंट जमा करने, कॉपी मूल्यांकन तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों के नाम पर अवैध धन उगाही लगातार की जाती रही हैं. छात्रों से पैसे लेकर कार्य कराने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. संगठन ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसे व्यक्ति, जिसके खिलाफ पूर्व में जालसाजी जैसे आरोप प्रमाणित हो चुके हों और जिसका नैतिक चरित्र आधिकारिक दस्तावेज में संदिग्ध बताया गया हो, उसे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है. यदि किसी प्रकार की जातिगत या व्यक्तिगत संरक्षण के आधार पर ऐसे पदाधिकारी को बचाया जा रहा है तो यह विश्वविद्यालय की साख और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है.

जांच की मांग
उक्त मामले में आर एस ए ने मांग किया है कि प्रो विश्वामित्र पाण्डेय को दिए गए प्रोफेसर पद पर प्रमोशन की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कर उसे रद्द किया जाए. वहीं CCR रिपोर्ट में दर्ज Forgery Detected & Proved मामले में तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें वर्तमान प्रॉक्टर पद से तत्काल हटाया जाए. इसके साथ ही इग्नू अध्ययन केंद्र में छात्रों से हुई कथित अवैध वसूली की स्वतंत्र जांच कराई जाए एवं दोष सिद्ध होने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करते हुए कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजा जाए. आर एस ए नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन एवं बिहार सरकार ने इस गंभीर मामले पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो संगठन पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी.उज्ज्वल कुमार सिंह संरक्षक, आर एस ए,गुलशन यादव समेत अन्य संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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