बाल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर समन्वय को लेकर प्रमण्डल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन

बाल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर समन्वय को लेकर प्रमण्डल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन

 

CHHAPRA DESK –  बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर समन्वय को लेकर आज प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा छपरा संग्रहालय में किया गया. इस कार्यशाला में प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर समन्वय पर विचार किया गया. कार्यशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी सिवान, जिलाधिकारी सारण , वरीय पुलिस अधीक्षक सारण एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. इस अवसर पर जिला पदाधिकारी सारण द्वारा अपने संबोधन में विभिन्न हितधारकों को बताया गया कि समाज के सभी अंगों के समन्वय से बच्चों का भविष्य उज्जवल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना है.

 

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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के युग में समाज की बच्चों के प्रति जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है. बच्चों द्वारा सोशल मीडिया पर देखे जा रहे कंटेंट एवं उनके स्क्रीन टाइम पर नजर रखने की आवश्यकता है. जिलाधिकारी सिवान ने कहा कि स्कूल में बच्चों के व्यवहार की निरंतर मोनिटरिंग होनी चाहिये, इसमें शिक्षकों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है. वरीय पुलिस अधीक्षक सारण ने कहा कि बच्चों को संवारना समाज की नैतिक जिम्मेवारी है. हम जैसा सींचेंगे, वैसा ही पायेंगे. उन्होंने आज के समय में बच्चों को आकर्षित कर रही विभिन्न प्रकार की गलत प्रवित्तियों के बारे में उल्लेख किया तथा इन प्रवृत्तियों से बच्चों को बचाने की आवश्यकता एवं उपाय पर बल दिया. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत बाल संरक्षण की एक मजबूत व्यवस्था बनाई गई है.

जिला स्तर पर किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई जैसे हितधारक मिलकर बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं. सारण जिले में भी जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं. जिले में संचालित पर्यवेक्षण गृह में विधि विवादित बालकों को सुरक्षित आवास, शिक्षा और सुधारात्मक वातावरण प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकें. इसी प्रकार विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के माध्यम से उन बच्चों को देखभाल और संरक्षण मिलता है. जो अपने परिवार से अलग हो चुके हैं और उन्हें एक नया परिवार एवं स्नेहपूर्ण जीवन देने का प्रयास किया जाता है.

इसके साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना एवं प्रायोजन–देखरेख योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर तथा विशेष परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है. वास्तव में बाल संरक्षण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की परीक्षा है. जब प्रशासन, न्याय व्यवस्था, पुलिस, शिक्षा विभाग, सामाजिक संस्थाएँ और आम नागरिक मिलकर काम करते हैं, तभी हम बच्चों के लिए सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं. इस अवसर पर जिला पदाधिकारी सिवान/ सारण, उप विकास आयुक्त, सारण/सीवान, अपर समाहर्ता, सिवान/सारण, संयुक्त निदेशक, समाज कल्याण, बिहार पटना, राकेश कुमार, वरीय परामर्शी, यूनीसेफ तथा प्रमंडल स्तरीय बाल संरक्षण के सभी पदाधिकारी भी उपस्थित रहे.

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