
PATNA DESK – बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में आर्थिक अपराध ईकाई (Economic Offences Unit) यानि ईओयू (EOU) ने कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. जानकारी के अनुसार, ईओयू ने यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की. इस मामले की तफ्तीश शुरू हुई तो आरंभिक जांच में ही इतनी संपत्ति के सुराग मिले कि टीम को कई जिलों में एक साथ रेड करनी पड़ी. EOU ने एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत दरभंगा, मधुबनी के जयनगर, सुपौल के निर्मली और करजाइन समेत कुल सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. इन ठिकानों में आवास, कार्यालय और कथित व्यवसायिक स्थल शामिल हैं. बताया जा रहा है कि कार्रवाई से पहले निगरानी न्यायालय मुजफ्फरपुर से विधिवत सर्च वारंट लिया गया, जिसके बाद टीम ने अलग अलग स्थानों पर एक साथ दबिश दी.

आय से अधिक संपत्ति या उससे भी बड़ा खेल
बता दें कि मनोज कुमार रजक मधुबनी के जयनगर स्थित सप्लाई डिवीजन में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात हैं. उनके खिलाफ शिकायत मिली थी कि उन्होंने अपनी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाई है. सत्यापन के बाद EOU ने निगरानी न्यायालय मुजफ्फरपुर से सर्च वारंट लिया और फिर कार्रवाई शुरू की. जांच एजेंसी के अनुसार, मनोज कुमार रजक के खिलाफ शुरुआती शिकायत में 62.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने की बात सामने आई थी. लेकिन छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और निवेश के पैटर्न यह संकेत दे रहे हैं कि वास्तविक आंकड़ा 150 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा हो सकता है. यही कारण है कि अब जांच का फोकस सिर्फ संपत्ति के आंकड़े पर नहीं, बल्कि उसके स्रोत और नेटवर्क पर भी है.

जमीन, कारोबार और ‘हाईवे मॉडल’छापेमारी में अब तक 31 जमीन के दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जिनमें सबसे अहम सुपौल में नेशनल हाईवे के किनारे खरीदी गई जमीन है. जांच से यह संकेत मिला है कि रणनीतिक रूप से हाईवे और विकसित हो रहे इलाकों में निवेश किया गया. इसके अलावा अररिया और दरभंगा में कॉमर्शियल प्लॉट भी खरीदे गए जो भविष्य में बड़े आर्थिक लाभ का जरिया बन सकते थे. 2018 में पेट्रोल पंप खोलने की योजना भी इसी आर्थिक विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है. EOU के अनुसार आरोपी के पास दरभंगा में एक आलीशान मकान भी है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है. इसके अलावा अररिया में एक गैस एजेंसी, कई बैंक खाते और बीमा पॉलिसी की जानकारी मिली है.

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