CHHAPRA DESK – सारण जिले में पथ परिवहन विभाग के अंतर्गत विभिन्न तरह के पुल और सड़क परियोजनाओं के कार्यारंभ और निर्माण कार्य में काफी बिलंब होता दिख रहा है. ऐसा अवरोध आखिर क्यों न हो. इन योजनाओं में जब विभागीय स्तर पर निपटारा होने वाले कागजी करवाई में एक लम्बा वक्त और कार्यालयों की आपसी खींचतान हो रही है. सभी संबंधित विभाग एक दूसरे पर दोषारोपण कर अपने को साफ दिखाने में लग गए है. हालांकि इस खींचतान और आपसी विभागीय समन्वय का असर उक्त परियोजना के निर्माण लागत में बेतहाशा वृद्धि और उक्त निर्माण क्षेत्र में विकास कार्य के अवरोध उत्पन्न हो रहे है. जिले के एक मुख्य सड़क परियोजना छपरा हाजीपुर एक्सप्रेस वे और एक पुल परियोजना शेरपुर से दिघवारा सिक्स लेन पुल भी इसी दिक्कतो से होकर गुजर रहा है.

4 वर्ष का कार्य 13 वर्ष में भी अधूरा
छपरा सोनपुर एक्सप्रेस वे निर्माण की शुरुआत लगभग 13 वर्ष पूर्व हुई थी जिसे लगभग 4 वर्ष बाद पूर्ण हो जाना था. यह परियोजना अपने शुरुआत के 13 वर्ष बीतने के बाद भी 4 लेन की जगह लगभग 2 लेन ही पूर्ण हुई है. वही अभी तक इसकी प्रारंभिक लागत 700 करोड़ से बढ़ती हुई 14 सौ करोड़ तक पहुंच चुकी है. वही अभी कई ऐसी जगह है जहां के भू स्वामियों को अभी तक भूमि अधिग्रहण का मुआवजा प्राप्त ही नहीं हुआ है. वहीं ऐसी ही हालात शेरपुर दिघवारा सिक्स लेन पुल का भी हो चला है. जिस परियोजना का कागजी शुरुआत सितंबर 2023 में हो चुका है लेकिन धरातल पर अभी 1 प्रतिशत भी कार्य आरंभ नहीं हुआ है.

और आरंभ हो भी कैसे? अभी तक इस परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा का मामला न्यायालयों में विचाराधीन है. इस परियोजना के लिए अधिग्रहण के लिए जो रणनीति विभागीय स्तर पर हुई त्रुटि की शुरुआत वहीं से हुई.
अधिग्रहण के दर और अधिग्रहण क्षेत्र के भूमि के वास्तविक मूल्य में काफी अंतर ने भू स्वामियों को न्यायालय के रुख करने पर मजबूर कर दिया. इसका व्यापक असर निर्माण कार्य पर पड़ा. खास कर उन सभी भूमि जिनकी अधिग्रहण के दर में निबंधन और नोटिस के दर में अंतर है सभी भू स्वामी हर संभव लड़ाई के मूड में है. साथ ही उन जमीन के आस पास निर्माण कंपनी के कर्मियों के चहलकदमी से भी खासा नाराज हो जा रहे है.

डीएम से लेकर विधान परिषद तक गरमाया है मामला
ऐसा नहीं है की यह लड़ाई कोर्ट तक ही सीमित है, भू स्वामी धरती से लेकर सत्ता के शीर्ष विधान परिषद तक इस मुद्दे को उठावा चुके है. वही इस सभी कार्य के बावजूद अभी तक सरकारी अधिकारी केवल पत्र-पत्र की बात कह अपना पल्ला झाड़ रहे है. इसी परिस्थिति में शेरपुर दिघवारा सिक्स लेन परियोजना भी अधर में लटकती हुई दिख रही है. बता दें कि इससे संबंधित वर्तमान में लगभग 14 मुकदमा कमिश्नर सारण के यहां तथा लगभग आधा दर्जन मुकदमा पटना उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है

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