छपरा कचहरी स्टेशन की तीसरी आंख से होगी निगरानी; सिवान से रखी जाएगी नजर

CHHAPRA / SIWAN DESK –  छपरा कचहरी स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में रेल प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. अब स्टेशन परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि कचहरी स्टेशन पर अब तक सुरक्षा की दृष्टिकोण से एक भी कैमरा नहीं लगाए गए थे. वही अब आगामी एक सप्ताह के भीतर स्टेशन के सभी मुख्य द्वारों के साथ-साथ ऊपरगामी पुल (फुट ओवर ब्रिज) पर लगे कैमरे पूरी तरह संचालित हो जाएंगे. फिलहाल छपरा कचहरी स्टेशन पर कुल 15 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. इनमें 13 अत्याधुनिक बुलेट कैमरे शामिल हैं, जो स्टेशन के विभिन्न हिस्सों पर स्थायी रूप से नजर रखेंगे. इसके अलावा दो पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे लगाए गए हैं, जो चारों दिशाओं में घूमकर व्यापक क्षेत्र की निगरानी रखेंगे.

इन पीटीजेड कैमरों की खासियत यह है कि संदिग्ध गतिविधि दिखने पर इन्हें तुरंत उस दिशा में घुमाकर ज़ूम किया जा सकता है, जिससे हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके.
रेल प्रशासन द्वारा सर्कुलेटिंग एरिया में भी एक विशेष कैमरा लगाया गया है. यह कैमरा स्टेशन के बाहरी हिस्से में सक्रिय असामाजिक तत्वों, संदिग्ध व्यक्तियों और अव्यवस्थित गतिविधियों पर नजर रखेगा. इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्टेशन परिसर में अनुशासन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.वही सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग सिवान जंक्शन के कंट्रोल रूम से की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी. वही स्टेशन पर चोरी, छिनतई और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी.

सिवान से की जाएगी छपरा कचहरी स्टेशन की निगरानी

छपरा कचहरी स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरों को कचहरी स्टेशन पर लगाया तो जा रहा है लेकिन उनकी निगरानी सिवान से की जायेगी. जिस कारण जीआरपी असमंजस की स्थिति में बनी हुई है. सुरक्षा के लिहाज से यह सवाल उठ रहा है कि जब घटनास्थल छपरा में है तो कैमरों का कंट्रोल भी यहीं क्यों नहीं रखा गया. इस संबंध में जीआरपी कचहरी थानाध्यक्ष शैलेश कुमार तिवारी ने बताया कि यदि इन कैमरों की कंट्रोलिंग पावर छपरा से होती तो किसी भी आपराधिक घटना पर तुरंत नजर रखी जा सकती थी. उन्होंने कहा कि लाइव मॉनिटरिंग छपरा में होने से तत्काल कार्रवाई संभव होती और अपराधियों की पहचान भी तेजी से की जा सकती थी.

 

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