CHHAPRA DESK – छपरा सदर अस्पताल का मातृ शिशु अस्पताल जहां शहर वासियो और मरीजों को सुखद अनुभूति करा रहा है, वहीं सदर अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही है. यहां बीमारी ठीक तो किया जा रहा है लेकिन बीमारी फैलाने का सामान (कचरा) भी इसी अस्पताल में हैं. जिसका संक्रमण अस्पताल के बाहर तक आपको इसकी चपेट में ले सकता है. सदर अस्पताल में फेंका गया यह कचरा आपको किसी भी खतरनाक और घातक बीमारी की चपेट में ले सकता है. अगर बरसात हो गई तो तब तो आप अस्पताल के समीप से गुजरने में भी संक्रमित हो सकते हैं. इसके लिए पूरी तरह जिम्मेवार अस्पताल प्रशासन ही है. क्योंकि सदर अस्पताल परिसर में बायो मेडिकल कचरा डंप किया जा रहा है, जो कि बहुत ही नुकसानदेह और घातक है. लेकिन इसकी तरफ अस्पताल प्रशासन का ध्यान बिल्कुल ही नहीं है.

इस कचरा में सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर वार्ड, सर्जरी वार्ड व ब्लड बैंक का कचरा फेंका गया है. जिसमें आप देख सकते हैं कि यहां लाल, पीला, हरा, नीला, काला बैग में सभी प्रकार के बायो मेडिकल वेस्ट फेंके हुए हैं. जिसमें सभी घातक बीमारियों का कचरा भी उपलब्ध है ऐसी स्थिति में आप कितना सुरक्षित हैं, समझ लीजिए. यह कचरा अस्पताल परिसर में ही खुले में फेंका गया है. वह भी आरडीडीई कार्यालय, एआरटी केंद्र, कोरोना जांच केंद्र, डायलिसिस सेंटर एवं पोस्टमार्टम कक्ष के समीप इसे डंप किया जा रहा है. यह वह स्थान है जो कि अस्पताल और जेल के मध्य सड़क से सटे है. बरसात के बाद अस्पताल के इस परिसर में भरा पानी इसी रोड पर बहता है और अनजाने में सैकड़ो लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं.

कचरा प्रबंधन किसी भी अस्पताल के लिए है पहली प्राथमिकता
किसी भी नर्सिंग होम एवं अस्पताल के लिए बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट होना सबसे पहली प्राथमिकता है. क्योंकि, बायो मेडिकल वेस्ट का यह कचरा बहुत ही नुकसानदेह और हानिकारक होता है. जिसको लेकर सरकार ने गाइडलाइन भी तय किया है और यह सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य किया गया है कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से उनका सर्टिफिकेशन हो, जो अस्पताल के कचरे को नियमित रूप से उठाकर उसको प्रॉपर वे में डिस्पोज करती हो. लेकिन, दुर्भाग्य है कि इस नियम की सदर अस्पताल ही धड़ल्ले से धज्जियां उड़ा रहा है.

क्या है बायो मेडिकल वेस्ट/कचरा
बायो मेडिकल वेस्ट वह कचरा है जिसमें संक्रामक सामग्री होती है, जो मनुष्य या जानवरों के उपचार एवं टीकाकरण के उपरांत उत्पन्न होती है. जिसमें उपचार के दौरान फेंकी गई निडिल, सिरिंज, खून सने कॉटन, ब्लड बैग, संक्रमित कचरा कैथेटर, केनुला एवं अन्य सामान शामिल होते हैं. यह कचरा वास्तव में काफी नुकसानदेह होता है. जिसको लेकर बायो मेडिकल कचरे को पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति खतरनाक होने के कारण इसे सुरक्षित रूप से रखा जाना अनिवार्य है. वहीं इसके रखरखाव एवं डिस्पोजल के लिए कई कंपनियां काम भी करती है. वैसे किसी भी नर्सिंग होम के लिए बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है. जिसमें बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी उस नर्सिंग होम के अलग-अलग कलर के बैग में रखे कचरे को उसी अनुरूप संग्रहित करती है और उसे कंपनी में ले जाकर डिस्पोज किया जाता है.

किस बैग में कैसा है कचरा
* लाल बैग : ब्लड बैंक का कचरा, सनी हुई ड्रेसिंग, संक्रमित कचरा एवं आईवी सेट
* पीला बैग : संक्रमित प्लास्टिक कचरा, कैथेटर, केनुला, सिरिंज, ट्यूब, आईवी बोतल
* हरा बैग : निडिल, ब्लेड, धातु के धारदार एवं नुकीले सामान
* नीला बैग : टूटे हुए कांच का सामान, संक्रमित ग्लास, धातु के बने इंप्लांट, मेडिसिन वॉयल एवं एंपुल
* काला बैग : रेडियोएक्टिव कचरा

क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
इस विषय पर पूछे जाने पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर आर एन तिवारी ने हलचल न्यूज़ को बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट/कचरा अस्पताल परिसर में फेंका जाना उनके संज्ञान में नहीं है. इस विषय पर वह जांच कर कार्रवाई करेंगे.

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