
GAYAJI / CHHAPRA DESK – बीते 21 नवंबर को हावड़ा-जोधपुर बीकानेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में गयाजी के समीप एक किलो सोना लूटकांड में थानेदार ही मास्टरमाइंड निकला. मामला उजागर होते ही रेल थाना में हड़कंप मच गया था. इस मामले में थानेदार के साथ केस आयो एवं चार सिपाहियों को भी निलंबित किया जा चुका है. निलंबित थानेदार जीआरपी थाने में पदस्थापित राजेश कुमार सिंह बताए गए हैं. जो कि इससे पूर्व छपरा शहर के यातायात थाना प्रभारी और जीआरपी थाना प्रभारी भी रह चुके हैं. पुलिस मुख्यालय ने केस के अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) वीरेंद्र प्रसाद को सस्पेंड कर दिया है. उन पर जांच के दौरान मामले की लीपापोती करने और अहम बिंदुओं को दबाने का गंभीर आरोप लगा है.

हालांकि शुरुआती जांच में ही पुलिसकर्मियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई थी. ट्रेन में लूट, वह भी इतने बड़े पैमाने पर और बिना किसी पक्ष की अंदरूनी मदद के, बड़े सवाल खड़े कर रहा था. यही सवाल जांच को शक की दिशा में ले गई. सबसे पहले गाज गिरी रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह पर. उन्हें सस्पेंड किया गया. उनके साथ चार सिपाहियों को भी निलंबन का सामना करना पड़ा. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, तस्वीर और धुंधली होती गई. कई अहम सुरागों को नजरअंदाज किया गया. साक्ष्यों को कमजोर करने के आरोप सामने आए. सवाल उठने लगे कि क्या जांच सही दिशा में जा रही है या जानबूझकर भटकाई जा रही है.

इन्हीं शिकायतों के बाद पुलिस मुख्यालय ने केस के आईओ वीरेंद्र प्रसाद की भूमिका की समीक्षा कराई. समीक्षा में साफ हुआ कि जांच के दौरान उन्होंने तथ्यों को दबाने की कोशिश की. जरूरी बिंदुओं पर गंभीरता नहीं दिखाई. इसी आधार पर पुलिस मुख्यालय ने उन्हें भी सस्पेंड कर दिया इस पूरे मामले पर पटना रेल डीएसपी भास्कर रंजन ने कहा कि आईओ पर केस की जांच में लीपापोती का आरोप है. इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है. उन्होंने साफ किया कि मामला बेहद गंभीर है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो भी दोषी पाया जाएगा कार्रवाई होगी.

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