
CHHAPRA DESK – छपरा सदर अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है. जिसका नतीजा यह है कि जिले के मरीजों का भी विश्वास इस सरकारी अस्पताल के खिलाफ बढ़ा है. एक तरफ जहां ओपीडी में प्रतिमाह 30 हजार मरीज उपचार पा रहे हैं तो इमरजेंसी में भी प्रतिमाह कम से कम 5 हजार मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं. छपरा सदर अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन सह तत्कालीन क्षेत्रीय अपर निदेशक डॉक्टर सागर दुलाल सिन्हा का प्रयास जहां काबिले तारीफ रहा है, वहीं अस्पताल प्रबंधक के रूप में राजेश्वर प्रसाद का कार्यकाल भी बेहतर माना जा रहा है. ऐसी स्थिति में मरीजों का विश्वास सरकारी अस्पताल के खिलाफ काफी बढ़ा है, जहां उन्हें अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार प्राप्त हो रहा है.

प्राइवेट हॉस्पिटल को टक्कर दे रहा सदर अस्पताल
छपरा सदर अस्पताल में निस्संदेह चिकित्सा सुविधा में बहुत बड़ा सुधार हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि सदर अस्पताल में चिकित्सकों की आज भी घोर कमी है. बावजूद इसके ऊर्जावान युवा विशेषज्ञ चिकित्सक ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक पूरी तनमयता से संभाले हुए हैं. सदर अस्पताल में कुछ ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टर भी है जो कि ईमानदारी पूर्वक अस्पताल में मरीजों को बेहतर सेवा दे रहे हैं. ऐसी स्थिति में अनेक मरीज व उनके परिजन उन विशेषज्ञ चिकित्सकों के ड्यूटी वाले दिन का इंतजार उपचार करवाने के लिए करते हैं. इन चिकित्सकों में कुछ ऐसे भी चिकित्सक हैं जो कि ओपीडी खत्म होने के बाद भी इमरजेंसी वार्ड में अपनी सेवा देने के लिए ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के साथ उपस्थित रहते हैं. जिससे कि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल उपचार की सुविधा मिल सके. जिसे काफी सराहा जा रहा है और यही कारण है कि आज प्राइवेट अस्पतालों को सदर अस्पताल टक्कर दे रहा है.

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