सारण में धूमधाम से मनी लोककवि सह भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की जयंती ; कल्पना की गायकी से गूंजा भिखारी ठाकुर का गांव

सारण में धूमधाम से मनी लोककवि सह भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की जयंती ; कल्पना की गायकी से गूंजा भिखारी ठाकुर का गांव

CHHAPRA DESK –   भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की 137वीं जयंती सारण जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में धूमधाम के साथ मनाई गई. छपरा शहर स्थित भिखारी ठाकुर चौक पर भिखारी ठाकुर की मंडली के साथ सुशोभित प्रतिमा पर जिला अधिकारी अमन समीर एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कला प्रेमियों के द्वारा माल्यार्पण किया गया. उक्त अवसर पर भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया. वहीं भिखारी ठाकुर की जन्मस्थली कुतुबपुर दियारा में शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें चर्चित बॉलीवुड गायिका कल्पना पटवारी ने शानदार प्रस्तुति दी. उन्होंने बताया कि भिखारी ठाकुर की रचनाओं पर वह काफी दिनों से काम कर रही हैं और उनकी रचनाओं को गाकर अपने आप को धन्य समझ रही हैं.

उन्होंने “करिके गवनवा, भवनवा में छोड़ि कर करिके गवनवा, भवनवा में छोड़ि कर, अपने परईलन पुरूबवा बलमुआ … राजा कैसे कटिये सारी रतिया …, हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अंखिया से …, बेटी विलाप .. , कर दुखवा हमार पार…, ढर-ढर ढरकत बा लोर मोर हो बाबूजी… , विदेशिया नाटक सहित कई गानों को भी सुंदर रूप से गाया. वहीं भगवान श्रीकृष्णा और राधा पर आधारित भिखारी ठाकुर द्वारा लिखे गए गीत को भी गाया. वहीं कार्यक्रम की शुरुआत उच्च विधालय कोटवापट्टी रामपुर के छात्राओं के स्वागत गान से हुआ. कार्यक्रम मे दर्जनों कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर लोगों का मन मोहा. अरुण अलबेला सहित दर्जनों कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी.

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कुतुबपुर दियारा में हुआ था भिखारी ठाकुर का जन्म

भिखारी ठाकुर का जन्म सारण जिले सदर प्रखण्ड  के कुतुबपुर दियारा में हुआ था. हालांकि वे काफी कम पढ़े लिखे थे. उनकी शैली और बात करने का तरीका ठेठ गवई स्टाइल का था. जिससे उनकी बातें लोगों के काफी समझ में आती थी. ग्रामीण परिवेश से जुड़े होने के कारण वह लोगों में काफी लोकप्रिय थे. भिखारी ठाकुर ने जो उस समय समरस समाज की कल्पना की थी और समाज का स्वरूप कैसा होना चाहिए उसे उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से प्रदर्शित किया.

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