सरकारी अस्पताल से उठाकर पहुंचा दिया पटना के निजी अस्पताल ; बिल देखकर चकरा गया सिर ; अब अधिकारियों से लगा रहे गुहार

सरकारी अस्पताल से उठाकर पहुंचा दिया पटना के निजी अस्पताल ; बिल देखकर चकरा गया सिर ; अब अधिकारियों से लगा रहे गुहार

CHHAPRA DESK –  छपरा सदर अस्पताल में दलालों पर अंकुश लगाने का जिला प्रशासन का प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है. सदर अस्पताल में एक बार फिर दलालों की सक्रियता से मरीजों और परिजनों की परेशानी बढ़ गई है. बीते 20 फरवरी को बनियापुर थाना क्षेत्र के सकरवार टोला पिठोरी गांव निवासी स्वर्गीय गणेश राय की पत्नी शांति देवी भूमि विवाद में मारपीट की घटना में घायल हो गई थी. परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज शुरू होने से पहले ही कथित दलालों ने हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया. आरोप है कि दलालों ने परिजनों को यह बताया कि मरीज की हालत गंभीर है और यहां समुचित इलाज संभव नहीं है, इसलिए पटना रेफर कर दिया गया है.

घबराए परिजन उनके झांसे में आ गए और पटना ले जाने पर सहमत हो गए. पटना पहुंचने के बाद मरीज को अगम कुआं थाना अंतर्गत महात्मा गांधी नगर स्थित गीतांजलि नामक एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के नाम पर करीब 3 लाख 50 हजार रुपये की मोटी रकम बना दी गई. पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें बरगलाकर निजी अस्पताल ले जाया गया और उनसे वसूली की गई. परिजनों ने इस मामले को ले कर डीएम वैभव श्रीवास्तव, सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी और अस्पताल उपाधीक्षक डॉ के एम दुबे को आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है.


डीएम का निर्देश भी बेअसर एक बार फिर दलाल सक्रिय

सदर अस्पताल में कुछ दिन पूर्व ही डीएम व एसएसपी विनीत कुमार ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर निजी एंबुलेंस संचालकों पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था तथा दलालों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया था. जिसके साथ ही मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था करते हुए अस्पताल गेट पर पुलिस चेक पोस्ट बनाया गया और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई.इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं.

दलाल खुलेआम मरीजों और उनके परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी जांच केंद्रों व एंबुलेंस की ओर ले जा रहे हैं. अस्पताल में आने वाले गरीब और असहाय मरीज इनके झांसे में आकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं. पुलिस की मुस्तैदी के बाद भी दलालों का निर्भीक होकर सक्रिय रहना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. अस्पताल में दलालों का नेटवर्क इतना ज्यादा है कि प्रखंड से ही आने वाले एंबुलेंस को हाईजैक कर लेते है.

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