सील होने के बाद भी दूसरे स्थान पर क्लिनिक खोल रहे ‘मुन्ना भाई’ डॉक्टर ; इलाज के दौरान नवजात की मौत के बाद हंगामा ; शव के सौदे में जुटा गिरोह

सील होने के बाद भी दूसरे स्थान पर क्लिनिक खोल रहे ‘मुन्ना भाई’ डॉक्टर ; इलाज के दौरान नवजात की मौत के बाद हंगामा ; शव के सौदे में जुटा गिरोह

CHHAPRA DESK –  बिहार के सारण जिले में फर्जी और अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बावजूद फर्जी डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं. ताजा मामला आथ तरैया प्रखंड से सामने आया है, जहां प्रशासन द्वारा एक क्लिनिक को सील किए जाने के बावजूद डॉक्टर ने दूसरी जगह अपनी दुकान सजा ली और एक नवजात की जान ले ली।घटना के बाद क्लिनिक पर जमकर हंगामा हुआ, वहीं अब मामले को रफा-दफा करने के लिए ‘शव के सौदे’ का खेल शुरू हो गया है.

इलाज में लापरवाही और पुलिस की कार्रवाई

नवजात की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने पचभिंडा-शाहनेवाजपुर स्थित क्लिनिक पर भारी हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख तरैया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत करवाया. पुलिस ने क्लिनिक के एक कर्मी, अभिषेक कुमार को हिरासत में ले लिया है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है.

मृतक के परिजनों ने कहा डॉक्टर की लापरवाही से गई नवजात की जान

मृतक बच्चे के चाचा, इसुआपुर के केरवा गांव निवासी पप्पू कुमार यादव ने बताया कि उनके छोटे भाई अंकित कुमार यादव की पत्नी की डिलीवरी तरैया के देवरिया रोड स्थित डॉ उपेन्द्र के नर्सिंग होम में 09 जनवरी को हुई थी. डॉक्टर उपेन्द्र की सलाह पर उन्होंने बच्चे को डॉ अंगद राय के पास पचभिंडा-शाहनेवाजपुर स्थित क्लिनिक में भर्ती कराया.
पप्पू यादव का आरोप है कि डॉक्टर ने तीन दिनों तक बच्चे को क्लिनिक में रखा और स्थिति बिगड़ने पर आनन-फानन में छपरा रेफर कर दिया. छपरा में जब दूसरे डॉक्टर ने पिछले इलाज के कागजात और दवाइयों की जानकारी मांगी, तो डॉ अंगद ने ऑफिशियल लेटर पैड पर पर्ची देने से मना कर दिया।डॉक्टर ने सादे कागज पर लिख कर दिया, जिसे छपरा के अस्पताल ने स्वीकार नहीं किया. परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉ अंगद राय की लापरवाही और सही जानकारी न देने के कारण ही बच्चे की जान गई है.

27 दिसंबर को ही सिल हुई थी डॉ अंगद राय की क्लिनिक

रेफरल अस्पताल तरैया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एबी शरण के अनुसार, डॉ अंगद राय की क्लिनिक को बीते 27 दिसंबर 2025 को जांच टीम ने अवैध संचालन के आरोप में सील कर दिया था।लेकिन प्रशासन की इस कार्रवाई को ठेंगा दिखाते हुए डॉक्टर ने पचभिंडा-शाहनेवाजपुर में चोरी-छिपे नया क्लिनिक खोल लिया। इसी क्लिनिक में इलाज के दौरान एक नवजात बच्चे की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया है.

प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल ?

इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जब एक क्लिनिक को 27 दिसंबर को सील किया गया था, तो उसी डॉक्टर को दोबारा दूसरे स्थान पर अवैध रूप से काम करने की छूट कैसे मिली ? पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है. पप्पू यादव ने कहा, “जो हमारे साथ हुआ वो किसी और के साथ न हो, इसके लिए हम थाने में आवेदन देंगे और इस अवैध क्लिनिक को सील कराने के साथ-साथ दोषी डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.


शव के सौदेबाजी में जुटा ‘फर्जी नर्सिंग होम सिंडिकेट’

सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद फर्जी नर्सिंग होम संचालित करने वाला गिरोह सक्रिय हो गया है. बताया जा रहा है कि संचालक और उनके संरक्षक मृतक के परिजनों की आवाज दबाने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं. आरोप है कि नवजात शिशु के शव का सौदा करने और मामले को पैसे के दम पर रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके.

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

एक तरफ पुलिस कर्मी को हिरासत में लेकर जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सील क्लिनिक के बावजूद दूसरी जगह मौत की दुकान सजाना प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल उठाता है. स्थानीय लोग अब इस ‘मौत के सौदागर’ गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पचभिंडा-शाहनेवाजपुर वाले क्लिनिक को भी तुरंत सील करने की मांग कर रहे हैं.

 

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