शांति की पुकार: छपरा में गूंजेगी ‘रश्मिरथी’ की हुंकार, इप्टा का 29वां सम्मेलन 5 अप्रैल को

शांति की पुकार: छपरा में गूंजेगी ‘रश्मिरथी’ की हुंकार, इप्टा का 29वां सम्मेलन 5 अप्रैल को

CHHAPRA DESK – .​कला और वैचारिक चेतना की अग्रणी संस्था भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा), छपरा आगामी 5 अप्रैल (रविवार) को अपना 29वां जिला सम्मेलन सह लोक रंगोत्सव आयोजित करने जा रही है। युद्ध और हिंसा के वैश्विक साये के बीच, इस वर्ष के आयोजन का मुख्य केंद्र “युद्ध के खिलाफ… अमन-चैन-शान्ति के लिए” रखा गया है.

वैचारिक विमर्श और सांगठनिक सत्र

​सम्मेलन का शुभारंभ सुबह 10 बजे शहर के डाक बंगला रोड स्थित ब्रज किशोर विद्यालय में झंडोत्तोलन और इप्टा के गीतों के साथ होगा. दिवाकलीन सत्र में “युद्ध: शांति की संस्कृति बनाम हिंसा की राजनीति” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी. इसमें बुद्धिजीवी और संस्कृतिकर्मी वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में कला की भूमिका पर विमर्श करेंगे. दोपहर के सत्र में सांगठनिक प्रतिवेदन और नई कार्यकारिणी का चुनाव संपन्न होगा.

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​सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण : ‘रश्मिरथी’

​शाम 6 बजे से आयोजित होने वाला सांस्कृतिक सत्र आम जनता के लिए खुला रहेगा. इस शाम का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ पर आधारित नाटक की प्रस्तुति होगी. जिसका ​नाट्यांतरण एवं निर्देशन : डॉ० अमित रंजन, ​संगीत: कंचन बाला एवं टुन्नू तन्हा ने दिया है तो मनोरंजन पाठक, मृणाभ, कंचन बाला, शैलेन्द्र कुमार शाही, पंकज कुमार, अमितेश, विजय शंकर, शालिनी कुमारी, बबुआनन्द द्विवेदी, विनय कुमार, रंजीत गिरि, रंजीत भोजपुरिया, प्रिया श्रीवास्तव, प्रियंका श्रीवास्तव दीपा कुमारी वैष्णवी कुमारी आशीष कुमार सिंह शुभम राज दीक्षा सिंह मो० आरिफ़ सहित इप्टा के दो दर्जन से अधिक मंझे हुए कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे.

​नाटक के अलावा सांस्कृतिक सत्र में युद्ध विरोधी एकल अभिनय, कत्थक नृत्य, और इप्टा के पारंपरिक जनगीतों व गजलों की मनभावन प्रस्तुतियां भी होंगी. ​इप्टा के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य डॉ० अमित रंजन ने बताया कि “आज जब दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है, तब रश्मिरथी का शांति संदेश और इप्टा के जनगीत समाज में मानवीय मूल्यों को जगाने का काम करेंगे. सम्मेलन के संयोजक शैलेन्द्र कुमार शाही ने सारण के तमाम कलाप्रेमियों और नागरिकों से अपील की है कि वे सपरिवार इस ‘नि: शुल्क’ आयोजन का हिस्सा बनें और शांति की इस मुहिम को मजबूती दें.

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