शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम : महामहिम

शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम : महामहिम

CHHAPRA DESK –   जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) परिसर में आयोजित अखिल भारतीय दर्शन परिषद के 70वां राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए बिहार के महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट कर्नल अवकाश प्राप्त सैयद अता हसनैन ने शिक्षा, नैतिक मूल्यों और युवा शक्ति की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला. इससे पूर्व महामहिम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं गणमान्य अतिथियों को संबोधित करते हुए महामहिम ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण का प्रमुख आधार होते हैं. अपने भाषण में महामहिम ने कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना होना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के विकास में करें और सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें.

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राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि जयप्रकाश विश्वविद्यालय लगातार शैक्षणिक गतिविधियों, शोध एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक सशक्त पहचान बना रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और तकनीक का समावेश समय की आवश्यकता है, जिससे छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल सके. अपने संबोधन में उन्होंने नैतिक मूल्यों के महत्व को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ चरित्र और अनुशासन का होना भी आवश्यक है. उन्होंने विद्यार्थियों को ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक जिम्मेदारी को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी. महामहिम ने युवा पीढ़ी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में सुरक्षित है. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें, कठिनाइयों से न घबराएं और निरंतर प्रयास करते रहें. सफलता उन्हीं को मिलती है जो मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ते हैं.


महामहिम ने विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें नई दिशा देने का कार्य करते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि जयप्रकाश विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा. जयप्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अखिल भारतीय दर्शन परिषद’ के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए महामहिम राज्यपाल ने भारतीय दर्शन की गहराई और उसकी आधुनिक प्रासंगिकता पर बल दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिक या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अत्यंत वैज्ञानिक, तार्किक और दार्शनिक है.


अद्वैत और आधुनिकता का मिलन है

अपने संबोधन में महामहिम ने परम पूज्य दयाल स्वामी जी के ‘प्रेम अद्वैत’ के सिद्धांत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह दर्शन करुणा पर आधारित है, जो आज के समय में समाज को जोड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक है. राज्यपाल ने पंडित रामावतार शर्मा के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन ने हमेशा से चर और अचर (सजीव और निर्जीव) के बीच एक गहरे चेतनात्मक संबंध को स्वीकार किया है. राजयपाल ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के दौर में दर्शन की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के तकनीक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और आधुनिक तकनीकों के इस दौर में हमारे सामने नई चुनौतियां और नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं. उन्होंने विद्वानों और शोधकर्ताओं से प्रश्न किया कि क्या हम अपने प्राचीन विचारों को इतना व्यापक और गहरा बना सकते हैं कि वे आज की समस्याओं का समाधान दे सकें? उन्होंने कुलपति के वक्तव्य का समर्थन करते हुए तकनीक और दर्शन के एकीकरण पर जोर दिया.


संपूर्ण क्रांति और नैतिक परिवर्तन
लोकनायक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘संपूर्ण क्रांति’ केवल राजनीतिक बदलाव का नारा नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक, सामाजिक और मानवीय परिवर्तन का आह्वान था। आज भी इस विचार को गहराई से समझने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. अपने संबोधन उन्होंने विश्वास जताया कि इस तीन दिवसीय अधिवेशन में होने वाले विचार-विमर्श से ऐसे निष्कर्ष निकलेंगे जो देश और मानवता के कल्याण के काम आएंगे. महामहिम ने छपरा की जनता और आयोजन समिति को इस सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी. इस अवसर पर देशभर से आए दार्शनिक, शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला. विद्यार्थियों ने राज्यपाल के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों ने भी कार्यक्रम की सफलता के लिए अपने विचार व्यक्त किए और अतिथियों का स्वागत किया.

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