विधुत विभाग के फ्रेंचाइजी कर्मियों की मांग को लेकर मीटर रीडर संघ ने किया धरना-प्रर्दशन ; कहा आरआरएफ और एमआरसी का विभाग में करें समायोजन

विधुत विभाग के फ्रेंचाइजी कर्मियों की मांग को लेकर मीटर रीडर संघ ने किया धरना-प्रर्दशन ; कहा आरआरएफ और एमआरसी का विभाग में करें समायोजन

CHHAPRA DESK – बिहार राज्य ग्रामीण विद्युत फ्रेंचाइजी कामगर संघ के बैनर तले ग्रामीण क्षेत्र में मीटर रीडर व राजस्व संग्रह करने वाले फ्रेंचाइजी कर्मियों ने नगरपालिका चौक पर सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया. प्रर्दशनकारी मीटर रीडर व राजस्व संग्रह कर्मियों का कहना था कि उनके भविष्य के निर्धारण के बिना ही अचानक बिहार सरकार के द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर की योजना लाने से उनके समक्ष बेरोजगारी व भुखमरी की स्थिति उत्पन हो जाएगी और उनका परिवार सड़क पर आने को विवश हो जाएगा.

कर्मियों का कहना था कि वर्ष 2013 में विद्युत् विभाग के बिलिंग और राजस्व संग्रहण की लचर व्यवस्था को देखते हुए बिहार सरकार के द्वारा रूरल रेवेन्यू फ्रेंचाइजी योजना बनाकर संपूर्ण बिहार में लागू की गई. जिसके अंतर्गत राज्य के सभी पंचायत में एक-एक फ्रेंचाइजी को बिलिंग एवं राजस्व के लिए अधिक्रित किया गया. जिसका आधार एकरारनामा को बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2013 से अभी तक घर-घर जाकर बिलिंग व राजस्व संग्रहण का कार्य करते आ रहे हैं.

उनमें से कुछ लोग 2017 में विभाग के द्वारा लिए गए निर्णय जिसमें बिहार के बाहर की कंपनियों के द्वारा बिलिंग और राजस्व संग्रहण करने के निर्णय के कारण एमआरसी में बदल कर अब तक घर-घर जाकर बिलिंग व राजस्व संग्रहण का कार्य करते आ रहे हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं. हालांकि अब जिला मुख्यालय स्थित शहरी क्षेत्र के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के कवायद शुरू होने से अपने

भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं. कर्मियों का कहना था कि संघ के राज्य कमिटी के द्वारा कई बार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री को पत्राचार किया गया लेकिन इस मुद़्दे पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई. प्रर्दशनकारी कर्मियों का कहना है कि उनका स्मार्ट प्रीपड मीटर से काेई विरोध नहीं है लेकिन इस तरह से उनके भविष्य से खिलवाड करना अमानवीय प्रतीत होता है.

सरकार स्मार्ट प्रीपड मीटर लगा रही है वो लगाए लेकिन हम सभी कर्मियों को उनके कार्यक्षेत्र में ही एक पद सृजित करते हुए समायोजित किया जाए जिससे उनका परिवार भूखे मरने से बच सके. बाद में प्रर्दशनकारी कर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन सौंप विद्युत् विभाग में कार्यरत सभी आरआरएफ और एमआरसी का विभाग में समायोजन करते हुए उनका न्यूनतम मानदेय ₹25000 तय करने की मांग की.

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