वेटलैंड पर संकट : 40 हजार बिगहा हरदिया चंवर में जलजमाव से खेती पर भी संकट

CHHAPRA DESK –  सारण जिलांतर्गत सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा व परसा प्रखंड के करीब 40 हजार बिगहा हरदिया चंवर की जमीन इन दिनों किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है. यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से लगभग छह माह जलजमाव की चपेट में रहता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसानों की संख्या लगभग आठ से 10 लाख आंकी गई है. परसा, दरियापुर, दिघवारा और सोनपुर प्रखंड के किसान सीधे तौर पर इस इलाके पर निर्भर हैं  क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वर्षों से इस इलाके में वेटलैंड के नियमों की अनदेखी की जा रही है. लिहाजा वेटलैंड के अधिनियमों के तहत वेटरन फोरम के महासचिव डॉ बीएनपी सिंह ने भी इस मामले को लेकर कोलकाता एनजीटी में याचिका दाखिल की है. इस दौरान यह भी सामने आया है कि क्षेत्र में कई निर्माण कार्य गैरकानूनी तरीके से चलाए जा रहे हैं, जो प्राकृतिक जलनिकासी को प्रभावित कर रहे हैं.

15 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई पूरी हो जानी चाहिए थी
खेती की स्थिति बेहद चिंताजनक है. खेतों में महीनों से जमा पानी नहीं निकल पा रहा है, जिससे गेहूं की बुआई प्रभावित हो रही है. तय समय सीमा 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब भी अधिकांश खेत जलमग्न हैं. नयागांव, हसनपुर, गोपालपुर, महदलीचक और चतुरपुर के किसान बताते हैं कि पोखरा पर, खनुवा, लतराही सहित कई इलाकों में पानी की मोटी परत बिछी हुई है. खेत तैयार नहीं हो पा रहे और बुआई की प्रक्रिया बाधित है.

पट्टेदार किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

सबसे अधिक मार पट्टेदार किसानों पर पड़ी है. जो जमीन पट्टे पर लेकर खेती करते हैं, उन्हें मालिक को तयशुदा अनाज या नगद राशि देनी होती है. एक पट्टेदार किसान ने बताया, “अगर गेहूं बोएंगे ही नहीं, तो मालिक को अनाज या पैसा कहां से देंगे?” इस स्थिति ने किसानों के रोजमर्रा के जीवन में तनाव और असुरक्षा को और बढ़ा दिया है.

मछली पालन बना निकासी में रोड़ा

किसानों का आरोप है कि मछली पालन से जुड़े लोग तालाबों में छोटे-छोटे बांध बनाकर पानी रोक देते हैं. इससे खेतों में जमा पानी की प्राकृतिक निकासी बाधित हो रही है. कई खेत अब तालाब के रूप में बदल चुके हैं, जिससे खेती पूरी तरह ठप पड़ गई है. किसान चेतावनी दे रहे हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इस इलाके में गेहूं की बुआई लगभग असंभव हो जाएगी. प्रशासनिक नाकामी: अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं हरदिया चंवर की यह स्थिति स्पष्ट करती है कि न केवल प्राकृतिक आपदाएं बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था और अवैध निर्माण ने भी किसानों की परेशानियों को बढ़ाया है. अगर प्रशासन ने जल्द राहत कार्य और अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं की,

तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में गंभीर खाद्य संकट और आर्थिक नुकसान के संकेत मिलने शुरू हो जाएंगे. यह संकट सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा को भी प्रभावित करेगा. किसानों का कहना है कि उनकी उम्मीदें अब प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी पर टिकी हैं. जलनिकासी की व्यवस्था, मुगल कैनाल की सफाई और अवैध बांध हटाने जैसी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि हरदिया चंवर में खेती समय पर हो और लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सके.

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