Chhapra Desk – जच्चा-बच्चा की सुरक्षा और सुरक्षित प्रसव को लेकर सरकार चाहे जितनज प्रयास कर ले लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कहीं न कहीं लापरवाही सामने आ जाती है. ताजा मामला छपरा सदर अस्पताल के सामने आया है जहां सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. वहीं हंगामे और तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस बात की सूचना भगवान बाजार थानाध्यक्ष मंजू सिंह को दी गई. जिसके बाद सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को संभाला. मृत प्रसव पीड़िता नगरा ओपी क्षेत्र के अफौर पूरब टोला निवासी विनोद कुमार दास की पत्नी गीता देवी बताई गई है.

घटना के संबंध में बताया जाता है कि गीता देवी को प्रसव वेदना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे छपरा सदर अस्पताल रेफर किया गया. जहां, बुधवार की सुबह 8:30 से छपरा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया. जिसके बाद जांच उपरांत पाया गया कि उस महिला के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो चुकी है. जिसके बाद उस प्रसव पीड़िता के गर्भ में मृत बच्चे को निकाला जाना था लेकिन इस कार्य में विलंब कर दिया गया. जिससे उस महिला की स्थिति बिगड़ने लगी और अंततः उसे छपरा सदर अस्पताल से रेफर कर दिया गया. लेकिन, उस महिला को जब तक परिजन किसी निजी क्लीनिक में ले जाते तब तक रास्ते में ही उस महिला की मौत हो गई. इस घटना के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और सदर अस्पताल में हंगामा करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना था कि सुबह में उन लोगों ने गीता को छपरा सदर अस्पताल में एडमिट कराया था. जबकि दोपहर में उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया, जिसके कारण उसकी मौत हुई है.

अगर अस्पताल प्रशासन के द्वारा उसे पहले रेफर कर दिया गया रहता तो उसकी जान बच सकती थी. हालांकि उनके हो-हंगामे को देखते हुए अस्पताल प्रशासन के द्वारा भगवान बाजा थाना को सूचना देकर पुलिस बल को बुलाया गया जिसके बाद सदर अस्पताल पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया.
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