Chhapra Desk- वर्तमान समय में युवाओं के लिए बेकारी की समस्या सबसे बड़ी है. अच्छे पढ़े लिखे युवा बेराजगार है. कोरोना काल ने कईयों की रोगजार छीन ली है. ऐसे में मढ़ौरा प्रखंड के भुआलपुर के युवाओं ने खुद का रोजगार गांवों में विकसित कर एक मिशाल पेश किया है. तीन साथी युवाओं ने अलग-अलग विश्वविद्यालयों से एमबीए, इंजीनियरिंग एवं मास कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पढ़ाई पूरी की. पहले प्रदेशों में रोजगार की तलाश की. मनोकुल नौकरी नहीं मिलने पर गांव लौटे और खुद का रोजगार विकसित किया. आज ये युवा खुद का रबड़ बैंड व ब्रासलेट समेत अन्य सामग्री के निर्माण के लिए छोटा रकम से प्लांट तैयार किया. जहां से उत्पादन कर जिले के ही बाजारों में सेल कर रहे है.
दो लाख रुपए की लागत से शुरू किया रोजगार
मढ़ौरा प्रखंड के भुआलपुर गांव निवासी आलोक रंजन ने अपने दोस्त मैकेनिकल इंजीनियर अब्दुल हकीम तथा प्रेम किशोर राय के साथ मिलकर गांव में ही पैसा कलेक्ट कर दो लाख रुपये से रबड़ व हेयरबैंड तथा ब्रासलेट समेत अन्य कॉस्मेटिक समानों की उत्पादन के लिए एक मशीन खरीदे. आलोक रंजन दिल्ली के विश्वविद्यालय से मास कॉम की पढ़ाई पूरी की है. वहीं उसके दोस्त अब्दुल हकीम मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है. प्रेम किशोर राय ने पूणे से एमबीए की पढ़ाई पूरी की है.

सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश के लिए पहले प्रदेश को गये. उसके बाद तीनों ने मिलकर यह ठाना कि क्यों नहीं गांव में रोजगार विकसित करें ताकि कुछ अन्य लोगों को रोजगार मिल सके. फिर दो लाख रुपये इकट्ठा कर तीनों ने मिलकर अहमदाबाद से रबड़ बैंड व उससे संबधित समान बनाने के लिए मशीन खरीदा. इसके अलावें रॉ मैटेरियल खरीद कर गांव में टीम बनाई. उसके बाद घर व आस-पास की महिलाओं को इस रोजगार से जोड़े. धीरे-धीरे उत्पादन अच्छा होने लगा और मार्केटिंग भी अच्छी होने लगी है. आज के समय में उत्पादित समान जिले के तमाम बाजारों में सस्ते दरों पर बिक्री हो रही है. पहले जिले में यह समान दूसरे प्रदेशों से मंगाये जा रहे थे। जो मंहंगा भी पड़ रहा था. इसमें हर समान पर 20 से 25 प्रतिशत कम खर्च आते है. इस कार्य में दर्जनों महिलाएं भी जुड़ी है. जिनको काम मिल गया है. हालांकि कोरोना काल में कुछ हद तक प्रभावित हुआ है लेकिन फिर से स्थापित हो चला है.
लोकल मार्केट के साथ ऑनलाइन भी बढ़ी मांग
तीनझ युवा रबर बैंड और ब्रासलेट के साथ साथ ग्रामीण स्तर पर तैयार किए गए मिट्टी के दीप, दउरी एवं चिपड़ी आदि सामानों की ऑनलाइन मार्केटिंग भी कर रहे हैं. जिसकी ऑनलाइन मार्केट में अच्छी मांग हो रही है. तीनों युवा गांव में कुम्हार की दयनीय हालत को देख कर उनको मार्केटिंग दिये है. उनके द्वारा उत्पादित मिट्टी के दीये व आकर्षक बर्तनों को ऑनलाइन प्लेटफार्म देकर विक्री तेज कर दी है.

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