MOTIHARI DESK – नेपाल की नाक में दम करने वाला बबलू भारत में भले ही कम एक्टिव रहा लेकिन उस कुख्यात को इंटरनेशनल मोस्ट वांटेड क्रिमिनल की श्रेणी में रखा गया था. देश के सबसे बड़े 100 करोड़ की फिरौती मांगने एवं दाउद के गुर्गे लाल मोहम्मद उर्फ मोहम्मद दर्जी को काठमांडू में टपकाने के बाद इंटरनेशनल पुलिस भी उसके पीछे लगी थी और बीते 29 अप्रैल को इंडिया-नेपाल के बॉर्डर पर नेपाल पुलिस ने एनकाउंटर में उसे पकड़ा. पुलिस की गोली उसके पैर में लगी थी. जिसके बाद उसे नेपाल के किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार चल रहा है. बताया जा रहा है कि नेपाल पुलिस द्वारा रुकी जाने के बाद वह बाइक से भाग रहा था जबकि उसके थैले में हथियार और मादक पदार्थ थे जिसे पुलिस ने बरामद किया है. हालांकि इस घटना के बाद भारत और नेपाल दोनों ही पुलिस उलझी गई है. यह बता दें कि बबलू पासवान मोतिहारी जिले के हरैया ओपी क्षेत्र का रहनेवाला है. उसकी पत्नी का नाम बेबी है.

अंडरवर्ल्ड में अपना दबदबा बनाने के लिए दाउद के गुर्गे का मर्डर कर दी थी चुनौती
अंडर वर्ल्ड में अपना दबदबा बनाने के लिए ही बबलू पासवान ने मोहम्मद दर्जी को निशाना बनाया था. वह जाली नोटों की सप्लाई के साथ ड्रग्स की तस्करी का बड़ा किंग पिन था. मोहम्मद दर्जी का नाम डी कंपनी के लिए भारत में जाली नोटों की खेप भेजने में आया था. दाउद के गुर्गे को मारने के बाद से बबलू पासवान नेपाल पुलिस की लिस्ट में मोस्ट वांटेड हो गया. उसने अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम के गुर्गे लाल मोहम्मद को मौत के घाट उतारकर डी कंपनी को सीधी चुनौती दी थी. बबलू पासवान ने लाल मोहम्मद उर्फ मोहम्मद दर्जी को 22 सितंबर 2020 को काठमांडू के कागेश्वरी मनोहरा नगर पालिका-8 के गोथातर में गोलियों से भून दिया था. मोहम्मद दर्जी काठमांडू के गोथातर में ‘एवेंजर एंटरप्राइजेज वर्ल्ड बेस्ट गारमेंट’ नाम से शॉप चलाता था, वह दाउद के लिए काम करता था तथा दाउद का खास गुर्गा भी माना जाता था.

नेपाल में एनकाउंटर के बाद मोतिहारी के हरैया ओपी अध्यक्ष पर बेबी ने दर्ज कराई प्राथमिकी
सूत्रों की माने तो बबलू पासवान की मोतीहारी पुलिस से अच्छी पहचान हो गई थी और वह मुखबिरी का भी काम करता था. जिसके कारण पुलिस वालों का भी फोन उसको आता जाता रहता था. बबलू पासवान की पत्नी बेबी के अनुसार बीते 26 अप्रैल को उसका पति बबलू भाई के घर पहुंचा और तभी हरैया ओपी अध्यक्ष अनुज का कॉल आया और वह संध्या उनसे मिलने के लिए निकल गया. लेकिन, उसके बाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ आया और जब वह परिवार संग हरैया योपी के साथ मोतिहारी थाने का भी चक्कर लगाती रही लेकिन उसे कोई जानकारी नहीं दी गई. उसे बताया गया कि हरैया ओपी अध्यक्ष मोतिहारी से बाहर हैं. तभी 29 अप्रैल को उसे सूचना मिली कि उसके पति को नेपाल पुलिस ने एनकाउंटर के दौरान उसके पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया है. जिसके बाद उसके द्वारा हरैया ओपी अध्यक्ष के खिलाफ पति को गायब करने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. उसका आरोप है कि हरैया ओपी अध्यक्ष ने 26 अप्रैल को उसके पति को बुलाया उसके बाद उसके द्वारा ही नेपाल पुलिस को सौंपा गया है. वहीं प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस कुछ भी बताने से परहेज कर रही है और इस मामले की लीपापोती की जा रही है. अब बबलू पासवान का एनकाउंटर सवालों में है. वह नेपाल पुलिस के हाथ कैसे लगा? क्या मोतिहारी पुलिस ने पकड़कर नेपाल पुलिस को सौंपा? दोनों देशों की पुलिस ने क्या आपस में अपराधियों को एक्सचेंज किया? मोस्ट वांटेड की गिरफ्तारी में ऐसे कई सवाल हैं, जिसका जवाब देने में दोनों देशों की पुलिस का पसीना छूट रहा है.

बबलू दुबे के गैंग से चर्चा में आया था बबलू पासवान
घटना 26 मई 2016 की है जब बबलू दुबे ने बबलू पासवान के साथ मिलकर नेपाल के बड़े उद्योगपति सुरेश केडिया का अपहरण कर लिया. हालांकि बबलू दुबे उस दौरान बक्सर जेल में था, जेल से ही उसने अपहरण की प्लानिंग की थी. घटना को अंजाम देने में बबलू पासवान की बड़ी भूमिका रही. रक्सौल बॉर्डर से सटे नेपाल के बीरगंज से दिन दहाड़े बड़े उद्योगपति सुरेश केडिया का अपहरण कर बबलू गैंग ने सनसनी फैला दी थी. भारत से लगी नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया. बावजूद इसके बबलू गैंग उद्योगपति सुरेश केडिया को भारतीय सीमा में लाने में सफल रहे. जिसके बाद बदमाशों ने 100 करोड़ की फिरौती मांगी. नेपाल ही नहीं भारत के लिए भी यह सबसे बड़ी फिरौती की रकम थी.

नेपाल पुलिस ने भारत से मदद मांगी और लगातार 65 घंटे की जॉइंट छापेमारी के बाद मोतिहारी पुलिस ने सुरेश केडिया को बरामद कर लिया। हालांकि, इस घटना में केडिया परिवार से जुड़े लोगों ने हवाला के जरिए काठमांडू से दिल्ली में फिरौती की 10 करोड़ भेजी भी थी. वारदात होने के साथ ही पुलिस गैंग को स्कैन करने में जुट जाती थी. सुरेश केडिया अपहरण कांड में बबलू पासवान 5 जून 2016 को नेपाल पुलिस के हाथ लग जाता है. दूसरी तरफ बबलू दुबे भी मोतिहारी पुलिस के हाथ लग जाता है. यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी थी, क्योंकि बबलू दुबे के पास से पुलिस एके 47 बरामद किया था. बबलू पासवान नेपाल की जेल में था, जबकि बबलू दुबे बेतिया जेल में बंद था.

कोर्ट में पैसे के दौरान बबलू दुबे की हुई थी हत्या
11 मार्च, 2017 में को कोर्ट में पेशी के दौरान बबलू दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद बबलू दुबे गैंग टूट गई. बबलू पासवान जब नेपाल जेल से बाहर आया तो ड्रग्स की तस्करी के नए धंधे में उतर आया. लेकिन, इस धंधे में पहले से ही डी कंपनी का एक तरफा राज था. जिसके बाद भी वह नेपाल से लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में ड्रग्स की खेप पहुंचा रहा था. जिसके बाद डी कंपनी से उसकी अदावत हुई और उसके द्वारा 22 सितंबर 2020 में काठमांडू जाकर दाऊद इब्राहिम के खास गुर्गा लाल मोहम्मद उर्फ मोहम्मद दर्जी को गोलियों से भूनकर दाऊद गिरोह को खुली चुनौती दे डाली थी.

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