प्रसव के उपरांत महिला की मौत के बाद परिजनों ने सड़क पर शव रखकर किया जाम ; पहुंची पुलिस

प्रसव के उपरांत महिला की मौत के बाद परिजनों ने सड़क पर शव रखकर किया जाम ; पहुंची पुलिस

 

CHHAPRA DESK –   सारण जिले में फर्जी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है और जिले में प्राय: ऐसे नर्सिंग होम के कारण “नीम हकीम खतरे जान” वाली कहावत चरितार्थ होती है. फिर ताजा मामला छपरा शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित ओम हेल्थ हॉस्पिटल से सामने आया है. प्रसव के उपरांत एक महिला की मौत उपचार के दौरान हुई है. इस घटना से आक्रोशित परिवार वालों ने अस्पताल के सामने बीच सड़क पर शव रखकर बस स्टैंड रोड को जाम कर दिया है. सूचना के बाद 112 डायल पुलिस पहुंची और इस घटना की सूचना भगवान बाजार थाना अध्यक्ष को दी गई. लेकिन करीब 1 घंटे बाद थाना अध्यक्ष दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित परिवार वालों को समझा-बुझाकर सड़क जाम नहीं कर नर्सिंग होम के बाहर शव को रखने की बात कही गई. जिसके बाद परिवार वाले फिलहाल शव को नर्सिंग होम के दरवाजे पर रखकर प्रदर्शन जारी रखे हैं. मृत प्रसव पीड़िता जिले के डेरनी थाना क्षेत्र के पीरारी गांव निवासी रणजीत राम की पत्नी संगीता देवी बताई जाती है. सड़क पर प्रदर्शन के दौरान मृत महिला के पति व परिवार वालों ने बताया कि प्रसव पीड़ा के साथ उनके द्वारा संगीता को बीते 25 मई को बस स्टैंड के समीप स्थित ओम हेल्थ हॉस्पिटल में डॉक्टर नेहा पांडे के यहां भर्ती कराया गया. जिसके बाद एक बच्चे का जन्म हुआ लेकिन उसके बाद संगीता की स्थिति बिगड़ती चली गई. जिसके बाद उनके द्वारा उसे पटना रेफर किया गया, जहां वे लोग निजी अस्पताल में उपचार करवा रहे थे लेकिन कोई सुधार नहीं हो पा रहा था. आज वहां उसकी मौत हो गई. उसे बचाने के लिए वे लोग जमीन बेचकर इलाज करवा रहे थे. उन लोगों ने आरोप लगाया है कि नेहा पांडे के गलत ऑपरेशन के कारण उसकी मौत हो गई.

51 आशा कार्यकर्ताओं को घुमाने को लेकर चर्चा में रही है नेहा पांडे

वैसे तो नेहा पांडे के क्लीनिक पर पहले भी ऐसी घटनाएं और हो-हंगामें होते रहे हैं. बीते वर्षों में जांच भी हुआ था और जांच में उस नर्सिंग होम को फर्जी पाए जाने के बाद बंद किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन मामला लीपापोती हो गया. हाल फिलहाल 51आशा कार्यकर्ताओं को देश के विभिन्न स्थलों का भ्रमण करने को लेकर वह चर्चा में आई थी. जिस पर जांच बैठा लेकिन उस जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और मामला ही गायब हो गया. अब देखना यह है कि इस हंगामे के बाद क्या कार्रवाई होती है.

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