भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच के लिए कैबिनेट ने दी मंजूरी ; एसडीपीओ व थानेदार पर मर्डर का केस दर्ज

भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच के लिए कैबिनेट ने दी मंजूरी ; एसडीपीओ व थानेदार पर मर्डर का केस दर्ज

BHOJPUR  DESK –   बिहार सरकार की कैबिनेट ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग इस मामले की जांच करेगा. आज सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे. परिजनों और अलग-अलग संगठनों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी. इस मामले में परिजनों के बयान के आधार पर एनकाउंटर में शामिल एसडीओ एवं एसएचओ सहित अन्य पुलिस कर्मियों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

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हथियार डालने के बाद पुलिस ने घेरकर मारी गोली

इस मामले में ग्रामीणों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के लिए बातचीत के दौरान भरत तिवारी ने उनकी बातों पर भरोसा करते हुए अपना हथियार पुलिस की ओर फेंककर सरेंडर किया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरेंडर के बाद एसडीपीओ राजेश शर्मा ने भरत के कंधे पर हाथ रखकर उसे आगे बढ़ाया. जिसके बाद भरत को 8 से 10 की संख्या में पुलिस वालों ने घेर लिया. कुछ ही मिनट बाद STF के जवान ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. ग्रामीणों का दावा है कि भरत को घटनास्थल पर 3 गोलियां मारी गईं. आरोप है कि पुलिस ने गाड़ी में भरत को 2 और गोलियां मारीं. हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया.

:मां के बयान पर हत्या का मामला दर्ज

आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ BNS की धारा 103(1)/3(8) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. मामले की जांच की जिम्मेदारी आरा सर्किल इंस्पेक्टर संजीव कुमार को दी गई है.bभरत तिवारी की मां ने जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर सरेंडर करने के बाद गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया था. 17 जून को भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी को उस वक्त गोली मारी थी, जब उसने फेसबुक लाइव आकर सरेंडर कर दिया था. यह इस केस में अब तक चौथी FIR है. अब तक सम्राट सरकार पुलिसवालों पर हत्या की FIR करने से बच रही थी.

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