जनगणना अधिनियम के तहत 106 पंचायत सचिवों पर डीएम ने लगाया एक हजार का अर्थ दंड

जनगणना अधिनियम के तहत 106 पंचायत सचिवों पर डीएम ने लगाया एक हजार का अर्थ दंड

 

CHHAPRA DESK –  जनगणना कार्य में सहयोग नहीं करने पर जिलाधिकारी सह प्रधान जनगणना अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सख्त कदम उठाया है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत कुल 106 पंचायत सचिव पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 (क) के तहत एक हजार रुपये का अर्थ दंड अधिरोपित किया है. अपने आदेश में उन्होंने कहा है कि उक्त राशि की कटौती पंचायत सचिवों के वेतन से करते हुए उनकी सेवा पुस्तिका में अंकित की जाएगी. ज्ञात हो कि विगत छ्ह मई को सभी पंचायत सेवकों को स्पष्टीकरण जारी किया गया था. जिसमें 24 घंटे की अवधि में संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से जवाब मांगा गया था. बीडीओ को स्पष्टीकरण का तामिला कराकर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया था. इस सम्बंध में जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने तामिला प्रतिवेदन समर्पित किया था लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी किसी पंचायत सेवक ने न तो योगदान किया है और न ही स्पष्टीकरण का जवाब दिया है. जिलाधिकारी ने इसे जिले में संचालित गतिविधियों में बाधा उत्पन्न करने और आदेश की अवहेलना मानते हुए जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 (क ) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए एक हजार रुपये आर्थिक दंड अधिरोपित किया है.

गौरतलब है कि जनगणना अधिनियम की इस धारा के तहत एक हजार के अर्थ दंड के साथ तीन साल के कारावास का प्रावधान भी है. जिन पंचायत सचिवों पर अर्थ दंड अधिरोपित किया गया है उनमें रिविलगंज के चार, दरियापुर के नौ, इसुआपुर के के तीन, छपरा के सात, एकमा के चार, सोनपुर के सात, मकेर के तीन, माँझी के 10, तरैया के चार, दिघवारा के पांच, मढ़ौरा के चार, गरखा के आठ मशरक के पांच, पानापुर के तीन, लहलादपुर के दो, जलालपुर के सात, अमनौर के छ्ह, बनियापुर के सात, नगरा के तीन और परसा के पांच पंचायत सचिव शामिल हैं. जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना राष्ट्रीय स्तर का अति महत्वपूर्ण एवं सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य है. इसके प्रति कोताही राष्ट्रहित की अवहेलना और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. भविष्य में भी ऐसे अधिकारी और कर्मी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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