रिश्वत लेते पकड़े गए बिहार के पूर्व इंजीनियर पर बड़ा एक्शन ; अब जब्त होगी करोड़ों की संपत्ति

रिश्वत लेते पकड़े गए बिहार के पूर्व इंजीनियर पर बड़ा एक्शन ; अब जब्त होगी करोड़ों की संपत्ति

PATNA DESK –  राजधानी पटना में आय से अधिक संपत्ति के एक पुराने मामले में पथ निर्माण विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) अवधेश कुमार सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं. निगरानी न्यायालय के प्राधिकृत पदाधिकारी ने उनकी कथित अवैध संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है. न्यायालय ने इस संबंध में पटना के जिलाधिकारी (डीएम) को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है. बता दें कि, यह मामला काफी पुराना है. इसकी शुरुआत उस समय हुई थी जब अवधेश कुमार सिंह को दिल्ली में कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था. जानकारी के अनुसार, दिल्ली के लाजपत नगर स्थित विक्रम होटल में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें 2.5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था.

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इस कार्रवाई के बाद उनकी आय और संपत्तियों की विस्तृत जांच शुरू हुई. जांच के दौरान यह मामला बिहार सरकार तक पहुंचा और वर्ष 2010 में सीबीआई की सूचना के आधार पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया गया. जांच एजेंसियों ने पाया कि अवधेश कुमार सिंह के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति मौजूद है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास लगभग 1 करोड़ 14 लाख 21 हजार 801 रुपये की ऐसी संपत्ति पाई गई, जिसका संतोषजनक स्रोत नहीं बताया जा सका. जांच में कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का भी खुलासा हुआ. इनमें तीन फ्लैट, दो कार्यालय, नकदी, बैंक जमा राशि, शेयर और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं. इन्हीं संपत्तियों को अवैध आय से अर्जित माना गया. अब इन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार

निगरानी न्यायालय के प्राधिकृत पदाधिकारी ने आदेश दिया है कि अवधेश कुमार सिंह एक महीने के भीतर अपनी संपत्तियों को पटना के जिलाधिकारी के समक्ष समर्पित करें. यदि वे निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं करते हैं तो प्रशासन को इन संपत्तियों को बलपूर्वक जब्त करने का अधिकार होगा. न्यायालय के इस आदेश को भ्रष्टाचार के मामलों में एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. इससे यह संदेश भी जाता है कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानून अपना काम कर रहा है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्धारित समय के भीतर संपत्ति समर्पित की जाती है या फिर प्रशासन जब्ती की कार्रवाई करता है.

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