
CHHAPRA DESK – सारण जिले का एक मात्र सुप्रसिद्ध फार्मेसी संस्थान विवेकानंद VIP फार्मेसी कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. कार्यक्रम के आयोजन में शिक्षा के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया. इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक सह रिविलगंज प्रखंड प्रमुख डॉ राहुल राज समेत प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षिकागण व सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही. इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2025 की थीम एजुकेशन फॉर ऑल रही.

यानि सभी के लिए शिक्षा: जो व्यक्तियों और समुदायों को तकनीकी प्रगति को समझने, समझने और प्रभावित करने के लिए शिक्षा की शक्ति पर चिंतन को प्रोत्साहित करता है. संस्थान के निदेशक डॉ राज ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने मन्तव्यों में कहा कि यह दिन एक प्रतिज्ञा है कि देश की शिक्षा व्यवस्था को कभी व्यर्थ न जाने देंगे. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. आज़ाद ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और आज़ाद भारत में शिक्षा की बुनियाद रखी.

वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे जिनका कार्यकाल 15 अगस्त 1947 से 2 फरवरी 1958 तक रहा। इस दिन की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) ने पहली बार 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में घोषित किया. मौलाना आज़ाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था, और उनकी जयंती पर इस उत्सव को समर्पित कर शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का निर्णय लिया गया. उनके मंत्री पद पर रहते हुए शिक्षा-संस्था की नींव रखी गई, जैसे कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)-प्रारम्भ, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)-सुझाव आदि.

संस्थान के प्राचार्य महोदय ने उक्त अवसर पर कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद न केवल राष्ट्र-निर्माण के विचारक थे, बल्कि एक प्रखर शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी भी थे. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का मूल उद्देश्य है, शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाना. उन्होंने यह भी कहा कि “शिक्षा” सिर्फ पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है; वह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को आकार देती है. संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा निबंध प्रतियोगिता, भाषण, वर्कशॉप, पोस्टर मेकिंग आदि के माध्यम से शिक्षा को सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाने का प्रयास किया.

![]()

