Chhapra Desk – छपरा सदर अस्पताल के छात्रावास कैंपस में जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा केयर इंडिया और यूनिसेफ के सहयोग से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. यूनिसेफ के राज्य प्रतिनिधि डॉ नलिनीकांत तिवारी ने जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों और प्रसव कक्ष के नर्सों को ट्रेनिंग दी. प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार के द्वारा किया गया. डॉ नलिनीकांत तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को जड़ से समाप्त करने तथा प्रसव कक्ष की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. इस कार्यक्रम के तहत मातृ एवं नवजात शिशुओं में मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के दौरान एवं उसके बाद गुणवत्ता में सुधार लाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में सभी गर्भवती माताओं को सम्मानपूर्वक मातृव देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध कराना इसका मुख्य लक्ष्य है.

भौतिक निरीक्षण कर 8 इंडिकेटरों की होती हैं जांच
सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने कहा कि संस्थागत प्रसव की दर में पहले की अपेक्षा काफ़ी बढ़ोतरी हुई हैं क्योंकि लक्ष्य कार्यक्रम को पूरी तरह से धरातल पर उतारा गया है. लक्ष्य योजना के तहत प्रमाणिकरण के लिए 362 मानकों (इंडिकेटर) की जांच की जाती हैं. जिसमें मुख्य रूप से सर्विस प्रोविजन, रोगी का अधिकार, इनयूट्रस, सपोर्ट सर्विसेज, क्लीनिकल सर्विसेज, इंफेक्शन कंट्रोल, क्वालिटी मैनेजमेंट, आउटकम शामिल हैं. इन सभी आठों इंडिकेटर्स का कुल 362 उपमानको पर अस्पताल के प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष का लगभग 6 से 9 महीनों तक लगातार क्वालिटी सर्किल (संस्थान स्तर पर), ज़िला कोचिंग दल (ज़िला स्तर पर), इसके अलावा क्षेत्रीय कोचिंग दल द्वारा लगातार पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण कर आवश्यकता अनुसार सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है. प्रशिक्षण के बाद अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया जाता और यह देखा जाता कि प्रशिक्षण लेने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा कार्य किया जा रहा हैं या नहीं. साथ ही उपरोक्त आठों इंडिकेटर्स के अनुरूप पंजी का संधारण व नियमानुसार समुचित ढंग से रखा जाता है या नहीं, इससे संबंधित निरीक्षण किया जाता हैं.

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