CHHAPRA DESK – आज 24 दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर सारण जिला उपभोक्ता आयोग कार्यालय में जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया. जिसके बाद उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह के द्वारा जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर कार्यालय परिसर से रवाना किया गया. उक्त अवसर पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष श्री सिंह के द्वारा विस्तार से यह बताया गया कि उपभोक्ता दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने बताया कि सबसे पहले आज ही के दिन अर्थात 24 दिसंबर 1986 को भारत में प्रथम बार राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया गया था. उपभोक्ता दिवस मनाने के पीछे उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता जागरूक हो और उनके जो हक और अधिकार हैं वह उनको प्राप्त हो. क्योंकि, आमतौर पर यह देखने में आता है कि कहीं पर कोई दुकानदार या कंपनी या किसी ऐसे सेक्टर में जो की उपभोक्ता कानून के दायरे में आता है लेकिन उनके द्वारा उपभोक्ताओं के हित का ध्यान नहीं रखा जाता है. दुकानदार उपभोक्ता को पक्का रसीद नहीं देते हैं, सामान कम तौल करके देते हैं, पुराना सामान बेच देते हैं अथवा अनैतिक व्यापार करते हैं, इन सारी चीजों से बचने के लिए लोगों को उपभोक्ता कानून के तहत यह अधिकार दिया गया है कि वह अपनी समस्याओं को लेकर के जिला उपभोक्ता आयोग में परिवार दायर कर सकते हैं.
₹50 लाख तक के परिवाद का दावा और निपटारा जिला उपभोक्ता आयोग में संभव
सारण जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष श्री सिंह ने बताया कि ₹50 लाख तक के परिवाद का दावा और निपटारा जिला उपभोक्ता आयोग में होता है जबकि ₹50 लाख से 10 करोड़ तक के विषयों का निपटारा राज्य आयोग में होता है और उसके ऊपर का जो दावा निपटारा होता है वह राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में होता है. उनके द्वारा यह भी बताया गया कि अधिवक्ता या स्वयं दोनों ही माध्यम से उपभोक्ता अपने मुकदमे को उपभोक्ता आयोग में दाखिल कर सकते हैं. इस अवसर पर उपभोक्ता आयोग की सदस्य मंजू देवी के द्वारा बताया गया कि आमतौर पर यह देखने में आता है कि जागरूकता के अभाव में लोग दुकानदारों, कंपनियां के गैरकानूनी कार्यों को चुपचाप बर्दाश्त कर लेते हैं और कहीं पर अपने मामले को नहीं ले जाते हैं.
उनको लगता है कि अपने मामले को किसी अदालत में दाखिल करने पर उनको बहुत समय और पैसा लगेगा. लेकिन, उपभोक्ता आयोग ऐसा जगह है जहां नाम मात्र के खर्चे में उपभोक्ता अपनी समस्याओं का निदान पा सकता है. इस अवसर पर अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह के द्वारा बताया गया कि जिला उपभोक्ता आयोग उपभोक्ताओं के लिए एक संजीवनी के रूप में है. जो उपभोक्ता किसी दुकानदार के कम नाप तौल, घटिया सामानों की आपूर्ति, कोई सामान बेचने के बाद उसको वापस नहीं लेने की जिद, ज्यादा पैसा लेने का कृत्य और कम पैसे का रसीद देकर उपभोक्ताओं को बरगलाने का कार्य करते हैं अथवा एक्सपायरी सामानों की आपूर्ति, घटिया खाद्य पदार्थ की आपूर्ति करते हैं वे सावधान रहें.
अगर ऐसा कोई भी दावा जो कोई दुकानदार या कंपनी पूरा नहीं करता हो बल्कि सिर्फ उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए गलत दावा करता हो वह अनैतिक व्यापार के श्रेणी में आता है और इन सब बातों को लेकर के उपभोक्ता अपने मुकदमे को उपभोक्ता आयोग में दाखिल कर सकते हैं. जिला उपभोक्ता आयोग त्वरित रूप से सुनवाई करते हुए उपभोक्ताओं को न्याय देने का कार्य करता है. इस अवसर पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह, सदस्य मंजू देवी के साथ अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, मनोज कुमार, उमाशंकर सिंह, दुर्गेश प्रकाश बिहारी, सियाराम सिंह सहित अनेक अधिवक्ता और जिला उपभोक्ता आयोग के कर्मचारी भी उपस्थित थे.