घोड़परास के बढ़ते आतंक को ले किसानों ने शूटर तैनाती व ठोस कार्रवाई की मांग की

घोड़परास के बढ़ते आतंक को ले किसानों ने शूटर तैनाती व ठोस कार्रवाई की मांग की

 

CHHAPRA DESK –  सारण जिला अंतर्गत मशरक प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों में इन दिनों घोड़परास का बढ़ता आतंक किसानों के लिए गंभीर संकट बन गया है. रबी सीजन की तैयार फसलें—गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों और विभिन्न हरी सब्जियां घोड़परास के झुंडों द्वारा लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है. किसानों का कहना है कि जैसे ही फसल पकने के कगार पर पहुंचती है, रात के अंधेरे में 20–30 की संख्या में घोड़परास खेतों में घुस जाते हैं और फसल को चरने के साथ-साथ पैरों से रौंदकर बर्बाद कर देते हैं. ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या पिछले कुछ वर्षों में और गंभीर हुई है. आसपास के खाली खेत, बाग-बगीचे और झाड़ीदार इलाके घोड़परास का ठिकाना बन चुके हैं.

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दिन में ये खुले क्षेत्रों में छिपे रहते हैं और रात होते ही खेतों पर धावा बोल देते हैं. कई पंचायतों में किसानों ने सामूहिक रूप से रात में पहरा देने की व्यवस्था की है. किसान टॉर्च, ढोल, पटाखे और अन्य साधनों से नीलगायों को भगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर लौट आते हैं. छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. जिनकी दो-तीन बीघा जमीन ही आय का मुख्य स्रोत है, उनकी आधी से अधिक फसल नष्ट हो चुकी है. किसानों का कहना है कि खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए गए, लेकिन उपज मिलने से पहले ही फसल चौपट हो रही है. कई किसानों पर सहकारी बैंक या निजी साहूकार का कर्ज है, जिसे चुकाने की चिंता अब उन्हें सता रही है.

किसानों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि घोड़परास की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए ठोस और कानूनी कदम उठाए जाये. उन्होंने सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत प्रशिक्षित शूटरों की तैनाती कर विशेष अभियान चलाने की मांग की है, ताकि फसलों को तत्काल राहत मिल सके. किसानों का कहना है कि जब तक प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक खेती सुरक्षित नहीं रह पाएगी. इसके अलावा ग्रामीणों ने फसल क्षति का त्वरित सर्वे कराकर मुआवजा देने, प्रभावित इलाकों में स्थायी तारबंदी या सोलर फेंसिंग की व्यवस्था करने, वन विभाग की नियमित गश्ती बढ़ाने तथा सामुदायिक स्तर पर सुरक्षा योजना लागू करने की भी मांग की है.

उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, जमीनी स्तर पर कार्रवाई जरूरी है. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में खेती से मोहभंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्र की कृषि उत्पादन व्यवस्था भी प्रभावित होगी. फिलहाल मशरक प्रखंड के किसान प्रशासन से शीघ्र और प्रभावी हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए हुए हैं, ताकि उनकी मेहनत की फसल सुरक्षित रह सके और उन्हें बार-बार होने वाले नुकसान से राहत मिल सके.

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