
GAYAJI DESK – महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल किसी एक जाति के नायक नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वाभिमान, स्वतंत्रता और संघर्ष के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि आज महापुरुषों को जातीय दायरे में बांटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जबकि उनका व्यक्तित्व समाज और राष्ट्र से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता को प्रेरित करता है. कार्यक्रम में उन्होंने महाराणा प्रताप की अश्वारोही प्रतिमा के अनावरण समारोह में शामिल होने को अपना मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बड़ी शक्तियों को चुनौती दी और अंतिम समय तक राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे. आनंद मोहन ने कहा कि विश्व इतिहास में भी महाराणा प्रताप के संघर्ष को प्रेरणा के रूप में देखा जाता है.

उन्होंने कहा कि वियतनाम के नेता हो ची मिन्ह ने भी महाराणा प्रताप के जीवन से यह सीखा कि छोटी शक्ति भी बड़े साम्राज्य को चुनौती देकर विजय प्राप्त कर सकती है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्तियों को कभी भुलाया नहीं जा सकता. ऐसे लोग इतिहास में एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार और आंदोलन के रूप में याद किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि समाज के लिए आवाज उठाने वालों के साथ हर परिस्थिति में खड़ा होना हम सभी की जिम्मेदारी है. पूर्व सांसद ने कहा कि आज जरूरत अपने इतिहास, स्वाभिमान और अधिकारों को पहचानने की है. समाज को एकजुट होकर महापुरुषों के आदर्शों को अपनाना होगा और उनके बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी.

इस मौके पर डॉ रवि कुमार सिंह, जितेंद्र बाबू, डॉ अजय, उदय सिंह, मनोज सिंह, राकेश सिंह समेत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, बुद्धिजीवी और युवा उपस्थित थे. इस कार्यक्रम में महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके त्याग, बलिदान और स्वाभिमान को नमन किया गया है. इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा महाराणा प्रताप के अनुयायी बड़ी संख्या में मौजूद रहे हैं. मीडिया से बातचीत करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि वे महाराणा प्रताप जयंती समारोह में शामिल होने के साथ-साथ 28 जून को सीतामढ़ी में प्रस्तावित प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम का निमंत्रण देने भी आए हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में अपने पुराने साथियों के साथ बैठकर बिहार की मूलभूत समस्याओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी.

संविधान से छेड़छाड़ मंजूर नहीं : आनंद मोहन
राजनीतिक सवालों पर आनंद मोहन ने कहा कि सम्राट चौधरी को उनका कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीच में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव का गलत संदेश समाज में जाता है. उनके अनुसार पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों में सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर सकारात्मक संदेश गया है और इस विश्वास को बनाए रखना जरूरी है. अपने पुत्र चेतन आनंद को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि एनडीए ने किसी पर कोई एहसान नहीं किया था. उन्होंने दावा किया कि चेतन आनंद ने कठिन परिस्थितियों में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक क्षमता साबित की है. उन्होंने कहा कि जनता के समर्थन और संघर्ष के बल पर ही सफलता मिलती है. बिहार की राजनीतिक संस्कृति पर बोलते हुए आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना होगा.

उन्होंने कहा कि राजनीति में बढ़ रही “थैली संस्कृति” और अवसरवाद लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती बनती जा रही है. निशांत कुमार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर दिए गए कथित बयान पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके वक्तव्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की. उनका कहना था कि जदयू कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि निशांत कुमार को राजनीतिक जिम्मेदारी मिले, लेकिन परिस्थितियां अलग दिशा में चली गईं. आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की स्वतंत्रता और स्वस्थ बहस जरूरी है. उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि किसी भी बयान को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत न किया जाए, बल्कि पूरी बात जनता के सामने रखी जाए.
