जनसंख्या संतुलन के नायकों का सम्मान, परिवार नियोजन में सबसे अधिक महिला बंध्याकरण के लिए डॉ मेहा को मिला आवार्ड

जनसंख्या संतुलन के नायकों का सम्मान, परिवार नियोजन में सबसे अधिक महिला बंध्याकरण के लिए डॉ मेहा को मिला आवार्ड

CHHAPRA DESK –   छपरा सदर अस्पताल स्थित जीएनएम स्कूल में आयोजित कार्यशाला सह सम्मान समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चिकित्सा संस्थानों और कर्मियों को मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए. कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी ने किया. कार्यशाला के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों को पुरस्कृत किया गया. पुरुष नसबंदी श्रेणी में मकेर पीएचसी को प्रथम, अमनौर को द्वितीय तथा छपरा सदर अस्पताल को तृतीय पुरस्कार मिला. महिला बंध्याकरण श्रेणी में दिघवारा सीएचसी को प्रथम, सोनपुर एसडीएच को द्वितीय तथा मकेर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ. पीपीआईयूसीडी श्रेणी में परसा प्रथम, मांझी द्वितीय एवं एकमा सीएचसी तृतीय स्थान पर रहा. एमपीए-अंतरा श्रेणी में रिविलगंज प्रथम, इसुआपुर द्वितीय तथा बनियापुर रेफरल अस्पताल तृतीय स्थान पर रहा.

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डॉ मेहा कुमारी को मिला प्रथम पुरस्कार

सबसे अधिक महिला बंध्याकरण करने के लिए गड़खा की डॉ मेहा कुमारी को प्रथम पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा परसा के डॉ सुमन कुमार को पुरुष नसबंदी, सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ आकृति प्रसाद को पीपीएच, तथा डॉ स्मृति सिन्हा को महिला बंध्याकरण एवं पुरुष नसबंदी में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

आशा, एएनएम व काउंसलर भी हुए सम्मानित

दरियापुर की एएनएम किरण कुमारी को पीपीआईयूसीडी, अमनौर की एएनएम विभा कुमारी को अंतरा कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिला. सोनपुर की आशा पिंकी कुमारी को महिला बंध्याकरण के लिए प्रेरित करने में, गड़खा की आशा गायत्री देवी को अंतरा के लिए प्रेरणा देने में, मकेर की आशा शहनवाज बेगम को पुरुष नसबंदी जागरूकता में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया. दरियापुर की आशा फेसीलिटेटर शिशु कुमारी को प्रेरक भूमिका के लिए, सदर अस्पताल की काउंसलर बबिता कुमारी को परिवार नियोजन परामर्श के लिए तथा मकेर के काउंसलर शुभम को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.


परिवार नियोजन से मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का माध्यम नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का महत्वपूर्ण उपाय है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय भागीदारी से ही समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ती है और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होती है. उन्होंने पुरस्कृत कर्मियों को भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया. कार्यशाला में परिवार नियोजन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा भी की गई और आगामी रणनीतियों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे.

स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण और प्रतिबद्धता से कार्यक्रम को मिल रहा है गति

जिला स्वास्थ्य समिति के डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने में हमारे चिकित्सकों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और काउंसलरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. आज जिन लोगों को सम्मानित किया गया है, उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति में उल्लेखनीय योगदान दिया है. परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और परिवार के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम है. हमारा प्रयास है कि प्रत्येक योग्य दंपति तक परिवार नियोजन सेवाएं सुलभ हों और समुदाय में जागरूकता बढ़े. सभी स्वास्थ्यकर्मी इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहें, ताकि जिला परिवार नियोजन कार्यक्रम में और बेहतर उपलब्धि हासिल कर सके.

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