CHHAPRA DESK- स्टेचर पर लिटाकर अस्पताल लाए गए 70 वर्षीय भरत राम जब करीब 15 दिन बाद अस्पताल से बाहर निकले तो तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. जिस बुजुर्ग के लिए एक कदम चलना भी मुश्किल हो गया था, वही अब अपने पैरों पर खड़े होकर मुस्कुराते हुए घर लौट रहे थे. रिविलगंज के दुर्गम दियारा क्षेत्र के आलेख टोला, सिताबदियारा निवासी भरत राम के कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद छपरा सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने न केवल उनका सफल ऑपरेशन किया, बल्कि जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के जरिए उन्हें फिर से चलने की स्थिति में पहुंचाया. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सदर अस्पताल, छपरा में इस तरह की सर्जरी पहली बार की गयी है. भरत राम अपनी पत्नी के साथ एक झोपड़ी में रहकर किसी तरह जीवन यापन करते हैं. आर्थिक स्थिति ऐसी है कि अस्पताल तक पहुंचने के लिए वाहन का किराया जुटाना भी उनके लिए मुश्किल था. रात में भोजन करने के बाद टहलते समय अचानक गिर पड़े और उनके कूल्हे की हड्डी टूट गयी. तेज दर्द से कराहते हुए किसी तरह सदर अस्पताल पहुंचे. जहां चिकित्सकों ने तत्काल जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि वे फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर से पीड़ित हैं. बुजुर्ग की उम्र और फ्रैक्चर की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने साधारण उपचार के बजाय हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का विकल्प चुना, ताकि मरीज को लंबे समय तक बिस्तर पर रहने की स्थिति से बचाया जा सके और उन्हें जल्द चलने-फिरने की दिशा में ले जाया जा सके.
सदर अस्पताल में पहली बार लिया गया चुनौतीपूर्ण फैसला
सदर अस्पताल में इस तरह की जटिल सर्जरी पहले नहीं हुई थी. ऐसे में इसे यहां करना चिकित्सकीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था. लेकिन, मरीज की आर्थिक स्थिति, उम्र और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल के वरीय पदाधिकारियों और चिकित्सकों की टीम ने तय किया कि ऑपरेशन सदर अस्पताल में ही कराया जाएगा. जिसके बाद ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम ने मरीज की स्थिति के अनुरूप बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से हिप रिप्लेसमेंट किया गया. ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ रवि अमृत ने बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की. ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया देने और मरीज की लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जिम्मेदारी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ अमरेश कुमार ने संभाली. चिकित्सकीय टीम की निगरानी में पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई. ऑपरेशन के बाद भी मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गयी और उनकी रिकवरी के अनुसार देखभाल की गयी.
