GOPALGANJ DESK - नेपाल और तिब्बत के पहाड़ों से आए भीषण सैलाब ने जहां नेपाल में भारी तबाही मचाई है, वहीं बिहार के गोपालगंज जिले के मछुआरों के लिए यह आजीविका का अवसर बन गया है नेपाल से उफनाई गंडक नदी की तेज धार के साथ बड़ी संख्या में मछलियां बहकर आ रही हैं, जिससे मंगलपुर पुल के आसपास का इलाका एक बड़े मत्स्य केंद्र में बदल गया है. रोहू, कतला, बोआ और मांगुर की भारमार मंगलपुर पुल गंडक नदी के मुहाने पर स्थित है, जहां नदी का पाट चौड़ा है और बहाव तेज है. नेपाल के जलाशयों और नदियों का जलस्तर बढ़ने से तिब्बती व हिमाचली नस्ल की रोहू, कतला, बोआ और मांगुर जैसी भारी-भरकम मछलियां मैदानी इलाकों में बहकर आ गई हैं. इन मछलियों का वजन 5 से 20 किलोग्राम तक है.
सैकड़ों मछुआरे मछली पकड़ने में जुटे
तटीय गांवों के सैकड़ों मछुआरे दिन-रात मंगलपुर पुल पर मछली पकड़ने में जुटे हैं. वे महाजाल, फेंका जाल और कांटे का उपयोग कर उफनती नदी से मछलियां निकाल रहे हैं. पुल की रेलिंग से जाल फेंककर विशालकाय मछलियों को खींचने का दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं. स्थानीय मछुआरों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुई है. रोजाना क्विंटल के हिसाब से पकड़ी जा रही इन मछलियों को किनारे पर ही 200 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव बेचा जा रहा है. इससे उन परिवारों को आर्थिक राहत मिली है जो हालिया बाढ़ और बारिश से प्रभावित हुए थे. हालांकि, गंडक नदी का तेज बहाव खतरनाक है. तेज धार के बीच नाव उतारना या पुल के किनारों से मछली पकड़ना जोखिम भरा है. स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा चेतावनी जारी की है, लेकिन मछुआरे अच्छे मुनाफे की उम्मीद में जोखिम उठा रहे हैं.
