PATNA / CHHAPRA DESK - बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा राज्य के 211 नवस्थापित महाविद्यालयों में 2532 सहायक प्राध्यापक पदों पर की जा रही नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में बिहार मुख्यालय, गर्दनीबाग, पटना में चल रहे आमरण अनशन को आज जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के शोधार्थियों एवं पीएचडी धारकों का व्यापक समर्थन मिला. अनशन स्थल पर डॉ रणवीर कुमार सिंह, डॉ कुणाल सिंह, डॉ राकेश भारती एवं छात्र नेता आशीष कुमार उर्फ गुलशन यादव सहित अनेक शोधार्थी एवं पीएचडी धारक उपस्थित रहे। सभी ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के अक्षरशः पालन की मांग दोहराई. आंदोलनकारियों ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सचिव को कार्रवाई हेतु अग्रसारित किया गया है। शिकायत वर्तमान में विचाराधीन है. आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोधार्थियों के सम्मान, समान अवसर तथा संवैधानिक एवं यूजीसी मानकों के संरक्षण के लिए है. उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं नियमसम्मत बनाया जाए.
पीएमओ में दर्ज शिकायत के प्रमुख आधार
* UGC Regulations-2018 के Table 3A का उल्लंघन कर नियुक्ति प्रक्रिया संचालित की गई.
* Ph.D. के निर्धारित 30 अंकों को कम कर तथा NET/JRF के अंकों को बढ़ाकर चयन प्रक्रिया में असंतुलन पैदा किया गया.
* UGC में प्रावधान न होने के बावजूद 10वीं एवं 12वीं के अंकों को चयन में शामिल किया गया।
* शोधपत्र, शिक्षण अनुभव एवं अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों की समुचित उपेक्षा की गई.
* नियमित पदों पर बड़े पैमाने पर संविदा नियुक्तियों को प्राथमिकता दी गई.
* UGC Regulations-2018 के Regulation 13.0 के अनुसार संविदा नियुक्ति की 10% सीमा का उल्लंघन कर लगभग सभी रिक्तियों पर संविदा बहाली की गई.
* Table 3A के प्रावधानों के विपरीत विश्वविद्यालय स्तर तक सीमित रहने वाली संविदा व्यवस्था का विस्तार किया गया.
उच्च शिक्षा में नियुक्ति के मानक निर्धारित करने के UGC के अधिकार की अनदेखी कर राज्य स्तर पर अलग व्यवस्था लागू की गई.
* संविधान की समवर्ती सूची (Entry-66) के अनुरूप UGC के अधिकार क्षेत्र की अवहेलना की गई.
* PhD एवं NET संबंधी UGC मानकों में राज्य स्तर पर परिवर्तन किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई.


