CHHAPRA DESK - सारण जिला के वित्तानुदानित/वित्तरहित स्कूल-कॉलेज के कर्मियों ने अपने वेतनादि भुगतान की कारवाई को अविलंब पूरा किए जाने के लिए आज से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया. कर्मियों ने नीति-निर्धारण में सरकार के टालमटोल नीति के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया. सरकार के वादाखिलाफी से क्षुब्ध कर्मियों ने रामजयपाल कॉलेज (लक्ष्मी नारायण पुस्तकालय) में आपात बैठक बुलाई. जहां वर्तमान परिस्थितियों एवं सरकार के हालिया निर्णय और मुख्यमंत्री के वादा खिलाफी पर नाराजगी प्रकट किया. वहीं सरकार के नकारात्मक रुख का विरोध करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया. सभी कर्मी रामजयपाल कॉलेज से डाक बंगला मार्ग थाना चौक होते हुए नगरपालिका चौक पैदल मार्च करते हुए विरोध प्रकट किया. बैनर पोस्टर और तिरंगा लिए वित्तरहित कर्मियों ने 

वित्तरहित कलंकित शिक्षानीति छोड़ो बिहार, 

वित्तरहित कर्मियों को ठगना बंद करो,  आज़ाद भारत के गुलाम शिक्षक मतलब बिहार के वित्तरहित शिक्षक,  वित्तरहित कलंकित शिक्षा नीति से लोकनायक और देशरत्न की धरती शर्मिंदा है, आदि नारबाजी के साथ प्रदर्शन किया. कर्मियों का कहना था कि, पिछले वर्ष कर्मियों ने पटना मे लगातार 23 दिनों तक प्रदर्शन किया था. वर्तमान मुख्यमंत्री ने उस वक्त खुद ही ट्वीट करके कर्मियों को वेतनादि भुगतान करने का वादा किया था. 17 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री ने एक सप्ताह मे आलाधिकारियों के साथ आवश्यक विमर्श कर सकारात्मक परिणाम देने का वादा किया था. अनुदान के बदले वेतनमान देने के वादा के अनुरूप सरकार द्वारा कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई, जिससे कर्मियों में भारी आक्रोश है. सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा गया कि, सरकार वित्तानुदानित/वित्तरहित स्कूल-कॉलेज के कर्मियों को वेतन देने के अपने वादे को पूरा करे और 15 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री गांधी मैदान से इसकी घोषणा करें. अन्यथा की स्थिति में अपने न्यायोचित मांग के समर्थन मे 15 अगस्त के बाद कर्मी अपने बाल-बच्चों के साथ राजधानी पटना की सड़कों पर उतरने व आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. जिसकी सारी जबाबदेही सरकार की होगी. 


 वित्तानुदानित/वित्तरहित शिक्षाकर्मियों की प्रमुख मांग 

राज्य के मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेज एवं सम्बद्ध डिग्री महाविद्यालयों मे नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों को समकक्ष राज्यकर्मियों के समान वेतन संरचना निर्धारित कर अनुदान के बदले नियमित मासिक वेतन सहित सभी सरकारी सुविधाएं प्रदान किया जाए.

* वित्तानुदानित संस्थानो को देय परीक्षाफल आधारित वास्तविक अनुदान राशि की अधिसीमा शिथिल कर सभी बकाए व्ययगत सत्रों के अनुदान राशि का एकमुश्त भुगतान सीधे कर्मियों के बैंक खाते मे किए जाने हेतु विभाग को निर्देशित किया जाए.

* राज्य के उच्य शिक्षा मे विगत चार दशकों से उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण योगदान करने वाले वित्तरहित शिक्षाकर्मी जो बिना कोई वेतन प्राप्त किए ही सेवानिवृत/दिवंगत हो गए हैं, उन्हे एवं उनके आश्रितों को जीवन-यापन हेतु से नियमित मासिक पेंशन/आर्थिक सहायता राशि प्रदान किया जाए.

* वित्तानुदानित स्कूल/कॉलेजों की रद्द मान्यता को पूर्ववत बहाल कर इन्हें स्थायी रूप से मान्यता प्रदान की जाए एवं राज्य हित मे इन संस्थानो का अधिग्रहण किया जाए.