CHHAPRA DESK - लगभग तीन दशक से बंद पड़ी सारण की ऐतिहासिक मढ़ौरा चीनी मिल के शुरू होने की उम्मीदों पर काले बादल मंडराते नजर आ रहे हैं. जिससे स्थानीय लोगों को बड़ा झटका लगा है. बता दें कि वर्ष 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने संकल्प पत्र में मढ़ौरा समेत राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना का वादा किया था, जिससे स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी थी. लेकिन, अब गन्ना उद्योग विभाग की ओर से तरैया प्रखंड के रामकोला फार्म हाउस की जमीन को नई चीनी मिल के लिए उपयुक्त मानते हुए 16 जुलाई 2026 को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिए जाने के बाद मढ़ौरा में विरोध तेज हो गया है. जानकारी के अनुसार, 'समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार' योजना के तहत विभाग ने मढ़ौरा के बजाय तरैया में नई चीनी मिल स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस फैसले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध जताया है. उनका कहना है कि जब मढ़ौरा में पहले से चीनी मिल की पर्याप्त भूमि और आधारभूत ढांचा उपलब्ध है, तो नई मिल यहीं स्थापित की जानी चाहिए या बंद पड़ी ऐतिहासिक चीनी मिल का पुनर्जीवन किया जाना चाहिए. इस मामले में राजद नेता विष्णु गुप्ता सहित कई स्थानीय लोगों का कहना है कि मढ़ौरा की ऐतिहासिक औद्योगिक पहचान को समाप्त नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा.

1902 में हुई थी स्थापना

ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1902 में स्थापित मढ़ौरा चीनी मिल कभी पूरे क्षेत्र की आर्थिक धुरी मानी जाती थी. यह मिल हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देती थी. स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1997 के आसपास मढ़ौरा का औद्योगिक वैभव धीरे-धीरे समाप्त होने लगा और चीनी मिल, मार्टिन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग तथा शराब मिल जैसी प्रमुख औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं.

विरासत बचाने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि मढ़ौरा क्लब, पुरानी डिस्टिलरी और चीनी मिल के अवशेष आज भी इस ऐतिहासिक औद्योगिक विरासत की गवाही देते हैं. उनका मानना है कि यदि सरकार नई चीनी मिल स्थापित करना चाहती है तो मढ़ौरा की ऐतिहासिक पहचान, उपलब्ध भूमि और पुराने आधारभूत ढांचे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मढ़ौरा की चीनी मिल केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान रही है. ऐसे में नई मिल को कहीं और स्थापित करना मढ़ौरा की ऐतिहासिक विरासत के साथ अन्याय होगा. लोगों ने सरकार से मांग की है कि मढ़ौरा चीनी मिल का पुनर्जीवन कर क्षेत्र के गौरव और रोजगार के नए अवसरों को फिर से बहाल किया जाए.