CHHAPRA DESK - छपरा नरक (नगर) निगम अपनी करतूत के लिए सदा ही चर्चा में बना रहता है. हल्की बरसात में जहां सड़क तालाब में तब्दील हो जाता है तो दूसरी तरफ शहर के रिहायशी इलाके में नगर निगम कूड़ा-कचरा का पहाड़ बना रहा है, जो कि शहर वासियों के लिए आक्रोश का कारण बना है. पूरे शहर का कचरा शहर के श्यामचक वार्ड नंबर दो स्थित रिहायशी इलाके के बीच में डंपिंग किया जाता है. वैसे तो यह नगर निगम का डंपिंग क्षेत्र बन गया है, लेकिन कूड़ा निस्तारण की यहां कोई व्यवस्था नहीं है और धीरे-धीरे यहां कूड़े का पहाड़ बनता नजर आ रहा है. जिसके कारण मोहल्ले वासियों का घरों में रहना दुभर हो गया है. घर वाले अपने घर में ताला बंद कर दूसरे मोहल्ले में किराए पर रहने को मजबूर हो गए हैं. वही इस समस्या का समाधान नहीं होते देखा कई लोग घर भी बेचने को तैयार हैं. 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में चल रहा मामला 

 छपरा नगर निगम द्वारा अवैध रूप से बनाए गए विशाल कूड़े के भंडार के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में महत्वपूर्ण सुनवाई चल रही है. याचिकाकर्ता ज्योति कुमारी की ओर से दायर इस याचिका पर ट्रिब्यूनल ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है.याचिकाकर्ता ने अपने मजबूत साक्ष्यों के साथ ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष शहर की बदहाल स्थिति को रखा. याचिका में बताया गया कि छपरा शहर के केंद्र में बसे श्यामचक मोहल्ले में पूरे शहर का ठोस अपशिष्ट कचरा अनियंत्रित तरीके से डंप किया जा रहा है. इस कचरे का किसी भी वैज्ञानिक या जैविक तरीके से उपचार (ट्रीटमेंट) नहीं किया जा रहा. नतीजतन, रिहायशी इलाके के बीचोंबीच 70 से 80 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है. सबसे भयावह स्थिति यह है कि जिस स्थान पर यह कचरा गिराया जा रहा है, ठीक वहीं पूरे छपरा शहर में जलापूर्ति करने वाले दो मुख्य पंपिंग स्टेशन भी स्थित हैं. कूड़े से होने वाले जहरीले रिसाव (लीचेट) के कारण आसपास के पूरे इलाके का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है. विडंबना यह है कि इसी दूषित पानी की आपूर्ति पूरे शहर में की जा रही है, जो आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ है.

नगर निगम के बाद डीएम और सीएम से लगा चुके हैं गुहार

बता दें कि कचरा डंपिंग स्थान के इर्द-गिर्द 150 से अधिक मकान है. अब कई लोग घर छोड़कर दूसरे मोहल्ले में किराए पर रहने के लिए बाध्य है. हालांकि इस संबंध में स्थानीय निवासी मेघा कुमारी, कुसुम देवी, सविता तिवारी, रंभा देवी, चिंता देवी, निशा देवी, बिंदु देवी, चमेली देवी, पार्वती देवी, मेनका देवी, आशा देवी, रश्मि राज, प्रियंका कुमारी, रश्मि शर्मा, सीता देवी, चिंता देवी, पिंकी कुमारी, मीना देवी, सुमन देवी, मीरा देवी मंजू देवी, रीमा देवी, भागमणि देवी, आशा सिंह, संज्योती देवी, शवेतांजय प्रिया, कलावती देवी, जानकी देवी, अरुण तिवारी, ध्रुवदेव पांडेय, गणेश साह, जनक देव प्रसाद, विशाल कुमार, तारकेश्वर प्रसाद, सहित मोहल्ले के दर्जनों लोगों के द्वारा नगर निगम आयुक्त के बाद, विधायक, डीएम एवं सीएम तक से गुहार लगा चुके है लेकिन स्थिति ढाक के तीन पाठ की ही है. मजबूरन लोग यहां जैसे तैसे जीवन बसर करने के लिए बाध्य है. नतीजतन घर के कई सदस्य प्रायः बीमार ही रहते हैं.