CHHAPRA DESK- बिहार के सभी जिला अस्पतालों में शल्य चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. अब सदर अस्पताल में उपलब्ध आधारभूत संरचना और मानव संसाधन को ध्यान में रखते हुए शल्य चिकित्सा की सुविधाओं की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. इसके तहत सामान्य शल्य चिकित्सा, अस्थि एवं जोड़, स्त्री एवं प्रसूति, नेत्र, कान-नाक-गला तथा दंत चिकित्सा विभागों में जरूरी शल्य क्रियाओं को चिन्हित कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का निर्देश दिया गया है. इस संबंध में डॉ प्रणय राज शरण सिन्हा, निदेशक प्रमुख (प्रशासन), स्वास्थ्य सेवाएं, पटना ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है.

शल्य चिकित्सा की क्षमता बढ़ाने पर जोर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि पूरे जिले को एक चिकित्सा इकाई के रूप में देखते हुए विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए, तो मरीजों को जिला स्तर पर अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. इसी सोच के तहत प्रथम चरण में सदर अस्पतालों को मजबूत किया जा रहा है. इनमें 24 घंटे आपातकालीन सेवा, एसएनसीयू, आईसीयू और ट्रायज जैसी सेवाओं को बेहतर करने के साथ-साथ शल्य चिकित्सा की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. विभाग की ओर से सभी जिलों के असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को चिन्हित शल्य क्रियाओं की सूची भेजकर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इन्हें क्रमबद्ध ढंग से विकसित करने का निर्देश दिया गया है.

जेनरल शल्य चिकित्सा में 15 प्रमुख प्रक्रियाएं

जेनरल शल्य चिकित्सा के तहत जिन प्रक्रियाओं को सभी सदर अस्पतालों में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया है, उनमें सिस्ट निकालना, हाइड्रोसील, हर्निया, अपेंडिक्स, भगंदर, गुदा की दरार, खतना एवं अन्य शिश्न संबंधी शल्य क्रियाएं, स्तन में सूजन की शल्य चिकित्सा, आंतों में रुकावट, आंतों में छेद, पित्ताशय निकालना, जिह्वा-बन्ध की शल्य क्रिया, बिना चीरा नसबंदी, त्वचा प्रत्यारोपण तथा घाव की मृत ऊतक सफाई शामिल हैं. इन प्रक्रियाओं के विकास से सामान्य शल्य चिकित्सा के बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार जिला अस्पतालों में ही किया जा सकेगा. हड्डी एवं जोड़ विभाग में जटिल उपचार की तैयारी ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भी कई महत्वपूर्ण शल्य क्रियाओं को शामिल किया गया है. इनमें टिबिया और फीमर में इंटरलॉकिंग नेल, ह्यूमरस की प्लेटिंग, टिबिया और फीमर की प्लेटिंग, रेडियस-उलना की नेलिंग व प्लेटिंग, टीईएनएस नेल लगाना, फीमर की गर्दन के फ्रैक्चर में हेमी-रिप्लेसमेंट, ट्रोकैंटेरिक फ्रैक्चर में पीएफएन, बाह्य स्थिरीकरण, बंद तरीके से हड्डी बैठाना और प्लास्टर, अस्थिमज्जा संक्रमण का प्रबंधन, हाथ की चोटों का उपचार, जन्मजात टेढ़े पैर का उपचार, फैशियोटॉमी और अंग विच्छेदन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. इन सुविधाओं के विस्तार से दुर्घटना और गंभीर चोट के मरीजों को जिला स्तर पर बेहतर शल्य चिकित्सा मिलने की संभावना बढ़ेगी.

प्रसूति एवं स्त्री रोग में जटिल ऑपरेशन भी शामिल

 स्त्री एवं प्रसूति विभाग में सामान्य और जटिल दोनों प्रकार की शल्य क्रियाओं को सूचीबद्ध किया गया है. इसमें निचले खंड की सिजेरियन शल्य क्रिया, जटिलताओं के साथ सिजेरियन शल्य क्रिया, पूर्ण गर्भाशय उच्छेदन, आंशिक गर्भाशय उच्छेदन, गर्भाशय का फटना, गर्भाशय के बाहर गर्भ ठहरना, चिकित्सकीय गर्भसमापन, दोनों नलिकाओं की नसबंदी, गर्भाशय की सफाई, प्रसवोत्तर चीरा, पेरिनियल मरम्मत, योनि मार्ग से गर्भाशय उच्छेदन, प्रसवोत्तर नसबंदी तथा अंडाशय की सिस्ट निकालना शामिल है. इन सेवाओं का उद्देश्य विशेषकर जटिल प्रसव और महिलाओं से जुड़ी ऐसी स्थितियों का जिला स्तर पर बेहतर प्रबंधन करना है, जिनमें समय पर शल्य चिकित्सा की आवश्यकता होती है.

नेत्र विभाग में मोतियाबिंद से लेकर पलकों की सर्जरी तक

नेत्र विभाग के लिए भी कई जरूरी शल्य क्रियाएं चिन्हित की गई हैं. इनमें छोटे चीरे से मोतियाबिंद ऑपरेशन, फेकोइमल्सिफिकेशन, ग्लूकोमा की शल्य चिकित्सा, आंसू की नली संबंधी शल्य क्रिया, आंख पर बढ़ी झिल्ली की शल्य चिकित्सा, पलकों की गांठ निकालना, पलक के अंदर की ओर मुड़ने की समस्या का उपचार, बाहर की ओर मुड़ी पलक का उपचार, आंख की चोट में पलक की मरम्मत तथा ब्लेफेरोप्लास्टी शामिल हैं. कान-नाक-गला उपचार में बढ़ेंगी शल्य सुविधाएं कान-नाक-गला विभाग में कान की लौ की शल्य चिकित्सा, सिस्ट निकालना, मास्टॉइडेक्टॉमी, मध्य कान के दीर्घकालीन संक्रमण का उपचार, कान के पर्दे की शल्य चिकित्सा, साइनस की शल्य क्रियाएं, स्वरयंत्र से संबंधित प्रक्रियाएं, बाहरी वस्तु निकालना, नाक की विकृति का उपचार, टॉन्सिल निकालना तथा ट्रेकियोस्टॉमी को चिन्हित किया गया है. इन सुविधाओं के विकसित होने से मरीजों को छोटी से लेकर कई आवश्यक जटिल शल्य क्रियाओं के लिए जिला स्तर पर उपचार का विकल्प मिलेगा.

दंत चिकित्सा सेवाओं में भी विस्तार

दंत चिकित्सा के क्षेत्र में दांत निकालना, दांतों की सफाई, दांत भरना, रूट कैनाल उपचार, बच्चों का दंत उपचार, सिस्ट निकालना, इंटरडेंटल वायरिंग, मुख कैंसर की जांच, दंत चोटों का प्रबंधन तथा दांतों की संरचनात्मक विसंगतियों का उपचार शामिल किया गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से दंत चिकित्सा को भी जिला अस्पतालों की शल्य चिकित्सा व्यवस्था के विस्तार का हिस्सा बनाया गया है, ताकि मरीजों को सामान्य दंत समस्याओं के लिए भी बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.