CHHAPRA DESK- सारण जिला के डोरीगंज थाना क्षेत्र में गंगा नदी के भीषण कटाव ने दियारा क्षेत्र के गांवों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है. लोककवि भिखारी ठाकुर के गांव की ओर बढ़ते कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. देखते ही देखते कई बीघा उपजाऊ जमीन गंगा में समा चुकी है. कटाव की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो लोककवि का गांव भी कहीं केवल नक्शे तक सिमटकर न रह जाए.
कोटवापट्टी रामपुर पंचायत के दयालचक और सुरतपुर तथा रायपुर बिंदगावां पंचायत के बिंदगावां एवं बलवन टोला गांव गंगा के कटाव की चपेट में आने के कगार पर हैं. नदी के लगातार बदलते रुख और तेजी से कटती जमीन को देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. लोगों को अपनी खेती-बारी, घर और गांव के भविष्य की चिंता सता रही है.
समय रहते नहीं हुई पहल तो मिट जाएगा गांवों का वजूद
गंगा के कटाव से कृषि योग्य भूमि का लगातार नदी में विलीन होना दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है. ग्रामीणों के सामने न केवल आजीविका का संकट है, बल्कि अपने आशियाने और पुश्तैनी जमीन को बचाने की चुनौती भी खड़ी है.
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि यदि समय रहते कटावरोधी उपाय नहीं किए गए तो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. खासकर लोककवि भिखारी ठाकुर के गांव को बचाने के लिए प्रभावी पहल की जरूरत महसूस की जा रही है. स्थानीय मुखिया सत्येंद्र सिंह ने बताया कि जलसंसाधन विभाग के लापरवाही के कारण कटाव हो रहा है उन्होने कहा कि एक साथ कोटवापट्टीरामपुर व रायपुर विंदगावां पंचायत मे बल्ला पायलींग और बोल्डर पिचिंग हो तो दियारा को बचाया जा सकता है,विभाग द्वारा एक गाँव को ठीक कर रही है नदी धार सीधा दुसरे गांव पर पर रही है लिहाजा कटाव होने लगता है. वहीं ग्रामीण रमेश सिंह, संटू तिवारी, मकई महतो, भूषण राय, रामबिनोद राय ने कहा कि पूर्व मे कइ गांव गंगा मे विलीन हो गए लिहाजा समय रहते संबंधित विभाग के अधिकारी कटाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करें और बचाव के लिए ठोस कार्ययोजना बनाएं. अब सवाल यह है कि प्रशासन और जल संसाधन विभाग गांवों को बचाने के लिए कब ठोस कदम उठाएंगे? कहीं ऐसा न हो कि कार्रवाई होने तक गांवों का बड़ा हिस्सा गंगा की धारा में विलीन हो चुका हो.

