CHHAPRA DESK - गंगा, सरयू व सोन नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण सारण जिले में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. इन नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से तटीय एवं दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. नदी किनारे बसे गांवों में लोग संभावित बाढ़ और कटाव को लेकर सशंकित हैं. तटीय क्षेत्र के डोरीगंज स्थित संवेदनशील तिवारी घाट तथा ऐतिहासिक-पुरातात्विक स्थल चिरांद में कटाव के खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से बालू भरे बैग लगाए गए हैं. लेकिन, ग्रामीणों का कहना है कि बढ़ते जलस्तर के बीच केवल कटावरोधी उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समय रहते बाढ़ से निपटने की ठोस तैयारी भी जरूरी है. इधर, खनुआ नाला जाम रहने के कारण दलित बस्ती में जलजमाव और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय लोगों ने नाले की तत्काल सफाई कराने की मांग की है. कोटवापट्टी रामपुर के मुखिया सत्येंद्र सिंह व ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सबसे जरूरी नावों की पर्याप्त व्यवस्था है, लेकिन फिलहाल इसकी तैयारी जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है. सबसे गंभीर बात यह है कि नाव मालिक, नाविक और गोताखोरों से जुड़े लोगों का आरोप है कि उनकी करीब एक वर्ष पूर्व की राशि अब तक बकाया है. उनका कहना है कि जब तक पूर्व की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक वे बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य में नाव उपलब्ध कराने अथवा गोताखोरी का कार्य करने में असमर्थ रहेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद व्यवस्था करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही नाव, नाविक और गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में जान-माल की सुरक्षा में कोई बाधा न पहुंचे. वहीं इन नदियों के जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण तटीय इलाके के लोग रात में भी चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं.